Lucknow Fake Currency Racket:राजधानी लखनऊ में नकली नोटों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मड़ियांव पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से बड़ी मात्रा में नकली नोट बरामद किए गए हैं। मामला देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने से जुड़ा होने के कारण वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत सूचना दी गई। इसके बाद कई जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गईं।
कई एजेंसियों ने की पूछताछ
गिरफ्तारी के बाद एटीएस, आईबी, एलआईयू और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने आरोपियों से लंबी पूछताछ की। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। पुलिस अब गिरोह के मुख्य सरगना और उसके सहयोगियों की तलाश कर रही है।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
पुलिस उपायुक्त उत्तरी गोपाल कृष्ण चौधरी के अनुसार, मड़ियांव पुलिस ने घैला पुल के पास एक मैदान में बने टिन शेड के नीचे से तीनों आरोपियों को पकड़ा। गिरफ्तार लोगों की पहचान आजमगढ़ के गंभीरवन निवासी आलोक सिंह, मुबारक पट्टी रामपुर के सोनू गौड़ उर्फ गोलू और सिधारी क्षेत्र के सारगढ़ निवासी बृजेश विश्वकर्मा के रूप में हुई है।
यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की गई। अपर पुलिस उपायुक्त ट्विंकल जैन और एसीपी अलीगंज शशि प्रकाश मिश्र के निर्देशन में पुलिस और क्राइम टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर आरोपियों को दबोचा।
लाखों रुपये की नकली करंसी बरामद
इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा और उनकी टीम ने जब आरोपियों के बैग की तलाशी ली तो उसमें भारी मात्रा में नकली नोट मिले। पुलिस के अनुसार, 500 रुपये के 1402 नकली नोट और 100 रुपये के 6946 नकली नोट बरामद किए गए हैं। कुल मिलाकर 13 लाख 95 हजार 600 रुपये की नकली करंसी जब्त की गई है।
नेपाल और खाड़ी देशों से जुड़ाव का शक
एसीपी शशि प्रकाश मिश्र ने बताया कि बरामद नोटों की गुणवत्ता काफी अच्छी है। पहली नजर में आम लोगों के लिए उन्हें पहचानना मुश्किल हो सकता है। नोटों की छपाई, आकार और कटिंग लगभग असली नोटों जैसी दिखाई देती है।
पूछताछ के दौरान कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि गिरोह का संबंध नेपाल, खाड़ी देशों या अंडरवर्ल्ड से तो नहीं है। साथ ही आजमगढ़ और वाराणसी में भी गिरोह के नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
तीन लाख नकली नोट के बदले एक लाख असली
पुलिस जांच में पता चला है कि गिरफ्तार तीनों आरोपी केवल डिलीवरी का काम करते थे। ये लोग करीब एक साल से नकली नोट पहुंचाने का काम कर रहे थे। गिरोह का संचालन आजमगढ़ निवासी मंजीत प्रधान और उसका भाई संतोष कर रहे थे।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह एक लाख रुपये के असली नोट लेकर बदले में तीन लाख रुपये की नकली करंसी देता था। पुलिस अब सरगना भाइयों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है और पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।
