Mathura news: मथुरा के फरह कस्बे में प्रेम और समर्पण की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली है, जिसने आधुनिक समाज के रिश्तों की परिभाषा बदल दी। यहाँ एक ही परिवार की तीन बुजुर्ग महिलाओं, जो रिश्ते में देवरानी-जेठानी थीं, के बीच इतना गहरा लगाव था कि मौत भी उन्हें जुदा नहीं कर सकी। 6 जनवरी को सबसे बड़ी जेठानी, 93 वर्षीय अंगूरी देवी के निधन के बाद, उनके वियोग में महज सात दिनों के भीतर दोनों देवरानियों, सोन देवी (77) और माया देवी (80) ने भी दम तोड़ दिया। ब्रज की धरती पर घटी यह घटना अब चर्चा का विषय बनी हुई है, जहाँ लोग इसे ‘दादियों’ के सच्चे प्रेम और अटूट सहेलीपन की पराकाष्ठा मान रहे हैं।
Mathura के फरह कस्बे में रहने वाली इन तीन बुजुर्ग महिलाओं की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती। जहाँ आज के दौर में पारिवारिक कलह और दूरियों की खबरें आम हैं, वहीं अंगूरी देवी, सोन देवी और माया देवी ने यह साबित कर दिया कि यदि मन साफ हो तो रिश्ते उम्र भर ही नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी साथ निभाते हैं।
एक-एक कर उजड़ गया कुनबा
इस दुखद मगर विस्मयकारी सिलसिले की शुरुआत 6 जनवरी को हुई। परिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्य और मुखिया, अंगूरी देवी (93 वर्ष) ने आयु संबंधी कारणों से अंतिम सांस ली। अंगूरी देवी न केवल घर की संरक्षक थीं, बल्कि अपनी दोनों देवरानियों के लिए मार्गदर्शक और सबसे करीबी मित्र भी थीं।
उनकी मृत्यु का सबसे गहरा असर 77 वर्षीय सोन देवी पर पड़ा। परिजनों के अनुसार, अपनी बड़ी बहन जैसी जेठानी के जाने के बाद से ही सोन देवी गहरे सदमे में थीं और उन्होंने खाना-पीना लगभग छोड़ दिया था। जेठानी की मृत्यु के ठीक पाँचवें दिन, यानी 11 जनवरी को सोन देवी ने भी इस संसार को अलविदा कह दिया। परिवार अभी इस दोहरे शोक से उबर भी नहीं पाया था कि तीसरी सदस्य, 80 वर्षीय माया देवी की स्थिति भी बिगड़ने लगी। वह अपनी दोनों सखियों के बिछोह को सहन नहीं कर सकीं और जेठानी की मृत्यु के सातवें दिन उन्होंने भी प्राण त्याग दिए।
मिसाल बन गई ‘दादियों’ की दोस्ती
कस्बे के लोग बताते हैं कि इन तीनों महिलाओं के घर भले ही अलग थे, लेकिन उनके दिल एक थे। दिन भर का अधिकांश समय वे साथ बिताती थीं। यदि स्वास्थ्य कारणों से वे मिल नहीं पाती थीं, तो अपने पोते-पोतियों के फोन के जरिए घंटों बातें किया करती थीं। उनके बीच कभी देवरानी-जेठानी वाला पारंपरिक मनमुटाव नहीं देखा गया, बल्कि वे एक-दूसरे की सबसे अच्छी सहेलियाँ थीं।
आज पूरे ब्रज क्षेत्र में इन ‘तीन दादियों’ के आपसी प्रेम और इस अनोखे संयोग की चर्चा हो रही है। स्थानीय Mathura निवासियों का कहना है कि यह केवल एक संयोग नहीं, बल्कि उनकी आत्माओं का गहरा मिलन था, जिसने उन्हें परलोक में भी साथ रहने के लिए प्रेरित किया।









