Mau Dalit assault case: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के सरायलखंसी थाना क्षेत्र में एक दलित युवक के साथ मारपीट और जातिगत उत्पीड़न का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित राहुल गौतम का आरोप है कि दबंगों ने न केवल उसे बेरहमी से पीटा, बल्कि शिक्षा को लेकर तंज कसते हुए कहा, “तुम पढ़-लिखकर डीएम बनोगे तो हमारा काम कौन करेगा?” यह घटना सितंबर 2025 की है, लेकिन स्थानीय पुलिस द्वारा कथित तौर पर राजनीतिक दबाव में कार्रवाई नहीं की गई। न्याय के लिए भटक रहे पीड़ित परिवार ने अंततः अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के कड़े रुख के बाद, करीब साढ़े तीन महीने की देरी से 13 जनवरी 2026 को पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
घटना का पूरा घटनाक्रम
Mau पीड़ित राहुल गौतम के भाई विशाल के अनुसार, यह विवाद 10 सितंबर 2025 को शुरू हुआ जब राहुल स्कूल से घर लौट रहा था। छोटी रस्तीपुर गांव के पास कृष्णा सिंह, प्रियांशु सिंह और आलोक सिंह ने उसे रास्ते में घेर लिया। आरोपियों ने पहले उसकी साइकिल रोकी और फिर उस पर हमला कर दिया। राहुल का आरोप है कि मारपीट के दौरान उसे जातिसूचक गालियां दी गईं और उसकी पढ़ाई-लिखाई को लेकर अपमानित किया गया।
अगले दिन पीड़ित पक्ष ने थाने में शिकायत दी और 12 सितंबर को मेडिकल परीक्षण भी कराया गया, जिसमें चोटों की पुष्टि हुई। हालांकि, परिजनों का दावा है कि आरोपियों के राजनीतिक रसूख के कारण पुलिस ने महीनों तक मामले को ठंडे बस्ते में डाले रखा।
दूसरे पक्ष और पुलिस की सफाई
मामला दर्ज होने के बाद दूसरे पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका तर्क है कि यह बच्चों के खेलकूद के दौरान हुआ एक सामान्य विवाद था जिसे स्थानीय लोगों ने सुलझा लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भीम आर्मी इस मामले को राजनीतिक रंग देकर उन्हें झूठे एससी-एसटी केस में फंसा रही है।
वहीं, Mau प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जानकारी होने से इनकार किया है। क्षेत्राधिकारी (CO) सदर कृष राजपूत ने स्पष्ट किया कि मामला पहले उनके संज्ञान में नहीं आया था, लेकिन अब पूरी निष्पक्षता से जांच की जाएगी। अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने कहा कि पुलिस किसी दबाव में काम नहीं करती और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
न्याय की प्रतीक्षा
यह मामला उत्तर प्रदेश में दलितों के खिलाफ हिंसा और प्राथमिकी दर्ज करने में होने वाली देरी की समस्या को एक बार फिर उजागर करता है। अब जब मामला दर्ज हो चुका है, ग्रामीण और सामाजिक संगठन Mau पुलिस की जांच पर नजर बनाए हुए हैं ताकि पीड़ित को उचित न्याय मिल सके।
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