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2027 से ठीक पहले मायावती ने ने लॉन्च किया ‘पीडीए’, कौन हैं ‘स्पेशल 7 योद्धा’ जो BSP को बनाएंगे विजेता

लखनऊ ऑनलाइन डेस्क। कांशीराम ने बीएसपी की स्थापना कर दलित समुदाय के अंदर राजनीतिक चेतना जगाकर देश व प्रदेश में सियासत की तस्वीर बदल दी थी। कांशीराम का कारवां बढ़ता गया, लोग जुड़ते गए और बीएसपी एक ताकतवर दल के तौर पर उभरी। कांशीराम के बाद बीएसपी की कमान मायवती के हाथों पर आई। जनता के आर्शीवाद से मायावती ने एक नहीं, चार बार सरकार बनाई। लेकिन 2012 के बाद से एकाएक मायावती का यूपी में रौला कम होने लगा। बीएसपी की सियासी जमीन लगातार दरकती जा रही। अगर पिछले 13 वर्ष की बात करें तो इस दौरान बीएसपी बहुत कमजोर हुई और मौजूदा समय में पार्टी के पास एक भी लोकसभा सांसद नहीं है और यूपी में सिर्फ एक विधायक है। ऐसे में मायवती एकबार फिर एक्टिव हैं। वह 2027 के सियासी दंगल में बड़े उलटफेर को लेकर रणनीति बनाने में जुट गई हैं। संगठन के पेच कसने के साथ ही मायावती ने बड़ा फेरबदल कर सपा-बीएसपी खेमे के अंदर हलचल बढ़ा दी है।

एक वक्त ऐसा भी था, जब शहर-शहर, गांव-गांव बीएसपी के झंडे घरों पर लहराया करते थे। चुनाव आते और बीएसपी चीफ हेलीकॉप्टर पर सवार होती तो उन्हें देखने-सुनने के लिए लाखों लोग घरों से पैदल ही रैलीस्थल की तरफ चल दिया करते थे। लेकिन पिछले 13 वर्ष के दौरान बीएसपी के ग्राफ में जबरदस्त गिरावट आई। कई बड़े नेताओं ने बीएसपी को छोड़ दूसरे दलों का दामन थाम लिया। ऐसे में अब मायावती की नजर 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में टिक गई है। बीएसपी के सियासी वजूद को बचाए रखने की चुनौतियों के बीच मायावती ने गुरुवार को पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। बीएसपी के बदलाव से एक बात साफ है कि कि मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को नंबर-2 की पोजिशन दी है और साथ ही पार्टी में तीन से बढ़ाकर छह राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बना दिए हैं। मायावती ने अखिलेश के पीडीए के बदले बीएसपी के पीडीए का गठन पर सपा की टेंशन बढ़ा दी है।

मायावती की नई टीम में एक भी मुस्लिम चेहरे को जगह नहीं दी। सभी पदाधिकारी दलित-ओबीसी समाज से हैं। आकाश आनंद यानि (ए) बीएसपी के मुख्य खेवनहार होंगे। आकाश आंनद के नेतृत्व में बीएसपी आगामी विधानसभा लड़ने का बन बना चुकी है। मायावती ने जहरं आकाश आनंद का प्रमोशन करते हुए मुख्य राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया है, वहीं यूपी की कमान विश्वनाथ पाल को सौंपी है। इसके अलावा छह राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाने के साथ-साथ यूपी सहित करीब डेढ़ दर्जन प्रदेश अध्यक्षों के नाम का भी ऐलान किया है। इनसब के बीएसपी में काफी पावरफुल माने जाने वाले रामजी गौतम के पर मायावती ने कतर दिए हैं। मायावती की स्पेशल 7 टीम में आकाश आनंद को मुख्य राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया है। रामजी गौतम, राजाराम, रणधीर सिंह बेनीवाल, लालजी मेधांकर, अतर सिंह राव और धर्मवीर सिंह अशोक को राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया है। पार्टी में अभी तक तीन राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर हुआ करते थे, जिसे बढ़ाकर अब छह कर दिया गया है।

मायावती ने लालजी मेधांकर, अतर सिंह राव और धर्मवीर सिंह अशोक को पहली बार राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर के तौर पर संगठन में कमान सौंपी है, जबकि राजाराम, रामजी और बेनीवाल पहले से ही इस भूमिका में काम कर रहे थे। इसके साथ ही मायावती ने राजाराम के साथ मोहित आनंद, अतर सिंह राव के साथ सुरेश आर्या और धर्मवीर अशोक के साथ दयाचंद को सह-प्रभारी के तौर पर लगाया है। बीएसपी में किए गए बदलाव में राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम को दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इस तरह से अब उनके पास चार राज्यों की कमान होगी, जबकि अभी तक देश के आधे से ज्यादा राज्यों के प्रभारी थे। राजस्थान जैसे अहम राज्य की कमान मायावती ने उनसे ले ली है, जो रामजी गौतम के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह राजस्थान की बागडोर अपने हाथों में रखना चाहते थे। दिलचस्प बात यह है कि पिछले दिनों जब मायावती ने आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाला था, तो रामजी गौतम का राजनीतिक कद बढ़ाया था। चार महीने के बाद अब मायावती ने जिस तरह रामजी गौतम से एक-एक कर कई राज्यों की जिम्मेदारी वापस ले ली है और अब सिर्फ चार ही राज्यों की जिम्मेदारी है।

बीएसपी चीफ ने देश के दूसरे प्रदेशों में भी फेरबदल किए हैं। बसपा प्रमुख ने राजेश तंवर को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, रमाकांत पिप्पल को मध्य प्रदेश अध्यक्ष, श्याम टंडन को छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। बिहार का प्रदेश अध्यक्ष शंकर महतो और महाराष्ट्र का प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनील डोंगरे को बनाया है। इसके अलावा, कर्नाटक की एम कृष्णा मूर्ति, तमिलनाडु की पी आनंद, केरल की ज्वाय आर थामस, हरियाणा की कृष्ण जमारपुर, पंजाब की अवतार सिंह करीपुरी, राजस्थान की प्रेम बारुपाल, झारखंड की शिव पूजन मेहता, पश्चिम बंगाल की मनोज हवलदार, ओडिशा की सरोज कुमार नायक, आंध्र प्रदेश की बंदेला गौतम, तेलंगाना की इब्राम शेखर, गुजरात की भगूभाई परमार, हिमाचल प्रदेश की विक्रम सिंह नायर, जम्मू-कश्मीर की दर्शन राणा, चंडीगढ़ की बृजपाल और उत्तराखंड की अमरजीत सिंह को कमान सौंपी है। बीएसपी की यूपी और देश की टीम में एक भी मुस्लिम चेहरे को जगह नहीं दी गई। बीएसपी ने दलित-ओबीसी पर ही दांव लगाया है।

मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को मुख्य भूमिका में रखा है। आकाश को चीफ राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया गया है. यह पद बसपा संगठन में राष्ट्रीय अध्यक्ष यानी मायावती के बाद आता है। मायावती ने भले ही अपने सियासी उत्तराधिकारी का औपचारिक ऐलान न किया हो, लेकिन आकाश आनंद को बसपा में नंबर दो की कुर्सी सौंपकर उनका सियासी कद बढ़ा दिया है। बसपा में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अब आकाश आनंद राष्ट्रीय अध्यक्ष यानी मायावती की देख-रेख में काम करेंगे। आकाश आनंद की जिम्मेदारी सभी सेक्टर, केंद्रीय और स्टेट कोऑर्डिनेटरों और प्रदेश अध्यक्षों के काम की समीक्षा करना है। इसके साथ ही वह सीधे मायावती को रिपोर्ट करेंगे। माना जा रहा है कि आकाश आनंद अब पार्टी की रणनीति, टिकट वितरण और चुनावी प्रचार से लेकर संगठनात्मक गतिविधियों तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों में बसपा की स्थिति को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

बीएसपी चीफ मायावती ने विश्वनाथ पाल पर अपना भरोसा कायम रखा है। बीएसपी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान विश्वनाथ पाल को लगातार दूसरी बार मिली है। बीएसपी में यह पहली बार है, जब मायावती ने किसी को दोहराया हो। मायावती का यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों में बसपा की स्थिति को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विश्वनाथ पाल गैर-यादव ओबीसी समुदाय से आते हैं। पाल-गड़रिया समाज एक समय बसपा का कोर वोटबैंक माना जाता था। सपा ने भी यूपी की कमान पाल समाज से आने वाले नेता को दी हुई है। बीजेपी भी पूजा पाल को अपने साथ लाने के मिशन में जुटी है। साथ ही पूजा पाल के जरिए सपा को घेर रही है। फिलहाल अभी सपा ने यूपी में अपने संगठन का विस्तार नहीं किया। जबकि बीएसपी ने चुनाव से दो वर्ष पहले अपने योद्धाओं को जमीन पर उताकर बड़े उलटफेर के संकेत दे दिए हैं। हालांकि बीएसपी की इस नई टीम में एक भी मुस्लिम चेहरे को जगह नहीं दी गई।

 

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