Meerut Gurjar Community Political Participation:मेरठ में गुर्जर समाज की ओर से राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर आवाज तेज हुई है। समाज से जुड़े लोगों ने कहा कि लंबे समय से राजनीतिक भागीदारी को लेकर उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर समाज को एकजुट करने की तैयारी चल रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुर्जर समाज की अहम भूमिका को देखते हुए इस ऐलान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के महीनों में भी मेरठ और पश्चिमी यूपी में गुर्जर समाज की राजनीतिक भागीदारी को लेकर कई बैठकें और सम्मेलन हुए हैं।
वोट पर बड़ा फैसला
महासभा की ओर से कहा गया है कि अगर समाज को उसकी राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं मिलती है तो चुनाव में वोट देने को लेकर भी बड़ा फैसला लिया जा सकता है। समाज के नेताओं का कहना है कि सिर्फ चुनाव के समय समर्थन मांगने के बजाय राजनीतिक दलों को प्रतिनिधित्व और भागीदारी के मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। यह संदेश ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल पश्चिमी यूपी के जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटे हैं।
दिल्ली में बड़ी रैली
गुर्जर महासभा ने 29 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में बड़ी रैली आयोजित करने का ऐलान किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह कार्यक्रम सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती के अवसर पर तालकटोरा स्टेडियम में प्रस्तावित है। इसे ‘गुर्जर स्वाभिमान रैली’ के तौर पर आयोजित करने की तैयारी है। अलग-अलग राज्यों में बैठकों के जरिए समाज के लोगों से बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचने की अपील की जा रही है।
गांव-गांव संपर्क अभियान
रैली को सफल बनाने के लिए समाज के पदाधिकारी अलग-अलग क्षेत्रों में बैठकें कर रहे हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश के मुरैना में हुई क्षेत्रीय बैठक में भी बड़ी संख्या में लोगों ने दिल्ली पहुंचने का संकल्प लिया। इसी तरह गाजियाबाद और एनसीआर में हुई बैठकों में भी 29 अक्टूबर के कार्यक्रम को लेकर लोगों को जोड़ने पर जोर दिया गया। महासभा का लक्ष्य समाज के अलग-अलग वर्गों को एक मंच पर लाना है।
चुनाव से पहले संदेश
गुर्जर समाज का यह रुख पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। समाज के नेता राजनीतिक दलों से अपने प्रतिनिधित्व को लेकर स्पष्ट आश्वासन चाहते हैं। ऐसे में 29 अक्टूबर की दिल्ली रैली सिर्फ सामाजिक आयोजन तक सीमित नहीं रहने की संभावना है, बल्कि इसके जरिए राजनीतिक दलों को भी संदेश देने की कोशिश होगी। हालांकि, वोट को लेकर अंतिम फैसला समाज की आगे होने वाली बैठकों और नेतृत्व के निर्णय पर निर्भर करेगा।
