BJP ticket war in Uttar Pradesh:यूपी में चुनावी सरगर्मियां बढ़ने के साथ बीजेपी के अंदर टिकट को लेकर नई हलचल शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी से बगावत करके बीजेपी के साथ आए सात विधायक अब अपनी-अपनी सीटों से कमल के निशान पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। समस्या यह है कि इन सीटों पर बीजेपी के पुराने नेता पहले से टिकट की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने बागियों को साथ रखने और पुराने कार्यकर्ताओं को नाराज न करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
गौरीगंज में पेच
अमेठी की गौरीगंज सीट पर सपा से निष्कासित विधायक राकेश प्रताप सिंह की दावेदारी चर्चा में है। उन्होंने राज्यसभा चुनाव में बीजेपी का समर्थन किया था और हाल में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की। दूसरी ओर बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी चंद्र प्रकाश मिश्रा उर्फ मटियारी टिकट के दावेदार हैं। 2022 में मटियारी को राकेश प्रताप सिंह से हार मिली थी। अगर बीजेपी राकेश पर भरोसा करती है तो मटियारी को साधना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती होगी।
गोसाईगंज में मुकाबला
अयोध्या की गोसाईगंज सीट पर अभय सिंह और पूर्व बीजेपी विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी के बीच टिकट को लेकर समीकरण दिलचस्प हैं। सपा विधायक रहे अभय सिंह ने भी बीजेपी नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश की है। वहीं खब्बू तिवारी की क्षेत्र में मजबूत पकड़ मानी जाती है। 2017 में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर अभय सिंह को हराया था। ऐसे में पार्टी के लिए दोनों में संतुलन बनाना आसान नहीं होगा।
तीन सीटों पर पेच
बदायूं की बिसौली सीट पर सपा के बागी विधायक आशुतोष मौर्य की नजर बीजेपी टिकट पर है। लेकिन 2017 में बीजेपी से विधायक रहे कुशाग्र सागर भी मजबूत दावेदार हैं। जालौन की कालपी सीट पर सपा से बीजेपी में आए विनोद चतुर्वेदी और 2022 में निषाद पार्टी-बीजेपी गठबंधन के उम्मीदवार रहे छोटे सिंह के बीच टिकट का पेच है। पिछली बार दोनों के बीच करीब 2,800 वोट का अंतर था। ऐसे में गठबंधन समीकरण भी महत्वपूर्ण होंगे।
जलालपुर में दावेदार
अंबेडकर नगर की जलालपुर सीट पर सपा के बागी विधायक राकेश पांडे के परिवार की दावेदारी चर्चा में है। उनके बेटे रितेश पांडे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा में मंच पर नजर आए थे। रितेश 2017 में बीएसपी के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। दूसरी तरफ बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी सुभाष चंद्र राय और राजेश सिंह भी टिकट की दौड़ में हैं। इसलिए यहां भी पार्टी को पुराने और नए दावेदारों के बीच संतुलन बनाना होगा।
मनोज पर भरोसा
रायबरेली की ऊंचाहार सीट पर मनोज कुमार पांडे की स्थिति बाकी सीटों से अलग दिखाई देती है। 2022 में उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी अमरपाल मौर्य को 6 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। बाद में बीजेपी ने अमरपाल मौर्य को राज्यसभा भेजने के साथ ओबीसी मोर्चे की राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी ऊंचाहार में मनोज कुमार पांडे को उतार सकती है और यहां टिकट को लेकर बड़े टकराव की संभावना कम है।
चायल में OBC दांव
कौशांबी की चायल सीट पर पूजा पाल बीजेपी की मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। जून 2026 में उन्हें उत्तर प्रदेश बीजेपी कार्यसमिति में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई। 2022 में उन्होंने अपना दल (एस) के उम्मीदवार नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल को 13 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। क्षेत्र में उनका ओबीसी प्रभाव बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए पार्टी उन्हें चुनावी मैदान में उतारकर प्रयागराज-कौशांबी क्षेत्र में अपना सामाजिक समीकरण मजबूत करना चाहेगी।
असली परीक्षा यहां
बीजेपी के लिए असली चुनौती इन सात बागी नेताओं को टिकट देने से ज्यादा पुराने कार्यकर्ताओं को साथ बनाए रखने की है। बागियों को टिकट मिलता है तो वर्षों से तैयारी कर रहे स्थानीय नेताओं में नाराजगी पैदा हो सकती है। वहीं टिकट नहीं मिलने पर बीजेपी में आए नए नेताओं के भरोसे पर सवाल उठ सकते हैं। यही वजह है कि यूपी की इन सात सीटों पर सिर्फ उम्मीदवार तय करना नहीं, बल्कि संगठन के भीतर असंतोष को संभालना भी बीजेपी नेतृत्व की बड़ी परीक्षा होगी।








