News1India Conclave: बीते दिन 22 दिसंबर को आगरा में News1 India के भव्य कॉन्क्लेव “महाकुंभ मंथन” का आयोजन किया गया था। जिसमें केंद्रीय मंत्री, धार्मिक संत और कई प्रमुख नेता शामिल हुए हैं। यह मंच समाज, राजनीति और धर्म से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन चर्चा और विचार-विमर्श के लिए था। इस मौके पर चंद्रशेखर आजाद भी शामिल हुए और उन्होंने इस मौके पर कहा जरुरी नहीं हर बार शिष्य त्याग दें।
बसपा पार्टी छोड़ने के पीछे मुख्य कारण बाबा कांशीराम का आंदोलन था। उस समय प्रयास किया जा रहा था कि यह आंदोलन आगे बढ़े। इसी दौरान हमने आरपीआई पार्टी बनाई, लेकिन आरपीआई के नेताओं ने बाबा कांशीराम को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद भीम आर्मी ने फैसला किया कि जब हम सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं और बिना किसी वेतन के काम कर रहे हैं, तो हमें इसे जारी रखना चाहिए। बाबा साहब ने कहा था, “राजनीति में हिस्सेदारी न करने का सबसे बड़ा दंड यह होगा कि योग्य लोग आप पर शासन करेंगे।” इसी प्रेरणा से हमने अंबेडकर और कांशीराम के अधूरे सपने को पूरा करने की कोशिश शुरू की।
जरुरी नहीं हर बार शिष्य ही एकलव्य बनें- आजाद
चंद्रशेखर आजाद ने मायावती के प्रति सम्मान दिखाते हुए कहा, “मायावती जी मेरी बड़ी हैं, मैं उनकी दीर्घायु की कामना करता हूं। उनके विचार और कांशीराम जी की मूर्ति मेरे दिल में हैं। जो काम उन्होंने किया, उसे नकारा नहीं जा सकता, लेकिन अभी भी समाज का बड़ा हिस्सा जागरूकता से दूर है। मैं एक छोटा सिपाही हूं और समाज के लिए काम कर रहा हूं।”देखिए, मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है, और मैं समझता हूं कि बहनजी समाज का भला चाहती हैं।
मुझे नहीं लगता (News1India Conclave) कि वह मुझसे ऐसा त्याग मांगेंगी। और यह भी जरूरी नहीं है कि हर बार गुरु अपने शिष्य से त्याग की मांग करें। हो सकता है कि वे खुद कहें, “अब तुम आगे बढ़ो।” मैं हल्की बातें नहीं करता। जिस दिन उन्होंने यह कह दिया कि “यह मेरा खून है, यह मेरी औलाद है,” तो मैं चुनौती के साथ कहता हूं कि इस देश में कोई भी कमजोर वर्ग और उनके बच्चों की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकेगा। यह बात आप नोट कर लें।
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महंगे जूतों पर उठे सवाल
10 लाख रुपये के जूते पहनने के सवाल पर उन्होंने जवाब दिया, “मेरे भाई ने 50 करोड़ की घड़ी पहनी तो क्या गलत है? क्या और लोग ऐसा नहीं करते? हमने आगरा में जूते बनाकर अपनी रोजी-रोटी चलाई है। अगर अब हम पहन रहे हैं, तो यह गलत कैसे है?”
बसपा के हालात पर क्या बोले चंद्रशेखर?
चंद्रशेखर ने मायावती और बसपा के हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “आंदोलन फुले, बाबा साहब और कांशीराम ने शुरू किया। यह किसी परिवार का आंदोलन नहीं था। एक समय था जब कांशीराम जी यह तय करते थे कि पंजाब या बिहार के पद पर कौन होगा। लेकिन आज हालात बदल गए हैं। ऐसे में केवल रोने से कुछ नहीं होगा। हमें संघर्ष करना होगा।”