Priyanka Gandhi Congress Parivartan Pratigya: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के 54वें जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने राज्य की राजनीति में अपनी वापसी का बड़ा दांव खेला है। पार्टी ने आज लखनऊ समेत प्रदेश के सभी 18 मंडलों में ‘परिवर्तन प्रतिज्ञा दिवस’ मनाते हुए 100 दिनों के सघन जनसंपर्क अभियान और साल भर चलने वाले ‘परिवर्तन प्रतिज्ञा’ अभियान की औपचारिक शुरुआत की। यह अभियान 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की रणनीति का आधार माना जा रहा है। इसका मुख्य फोकस पिछड़ों, दलितों और युवाओं को जोड़ते हुए योगी सरकार की नीतियों को चुनौती देना है। 2024 के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की सफलता के बाद, कांग्रेस अब प्रियंका गांधी के चेहरे पर अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश में है।
परिवर्तन प्रतिज्ञा अभियान: 100 दिनों का रोडमैप
कांग्रेस की इस नई रणनीति के तहत पार्टी ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें जमीन पर उतरकर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का लक्ष्य रखा गया है:
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संविधान संवाद महापंचायतें: पार्टी राज्य भर में संभागीय स्तर पर बड़ी रैलियां करेगी, जिसमें पिछड़ों और वंचितों के अधिकारों पर चर्चा होगी। इस श्रृंखला का समापन लखनऊ में एक विशाल रैली से होगा, जिसमें Priyanka Gandhi और राहुल गांधी के शामिल होने की संभावना है।
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‘सेव MGNREGA’ कैंपेन: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के गिरते स्तर को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस मनरेगा के बजट और क्रियान्वयन पर योगी सरकार को घेरेगी।
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ओबीसी विंग की सक्रियता: पार्टी की ओबीसी शाखा ने 1 करोड़ लोगों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा है। इसमें ‘प्रतिक्षा युवा संसद’ और ‘परिवर्तन प्रतिज्ञा पदयात्रा’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
2027 के लिए Priyanka Gandhi: ‘सुपर प्रभारी’ का अवतार?
दिसंबर 2025 से ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि क्या प्रियंका गांधी फिर से यूपी की कमान संभालेंगी। आज के कार्यक्रमों ने इन अटकलों को और बल दिया है। हालांकि वे वर्तमान में वायनाड से सांसद हैं, लेकिन यूपी कांग्रेस के कार्यकर्ता उन्हें 2027 का मुख्य चेहरा मान रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रियंका को फिर से यूपी का ‘सुपर प्रभारी’ बनाया जा सकता है, ताकि 2022 की संगठनात्मक कमियों को दूर किया जा सके।
चुनौतियां और सियासी समीकरण
कांग्रेस के लिए यह राह आसान नहीं है। बीजेपी का मजबूत संगठन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता एक बड़ी दीवार है। साथ ही, समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की भविष्य की स्थिति भी अभी धुंधली है। क्या कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी या अखिलेश यादव के साथ ‘बड़े भाई-छोटे भाई’ की भूमिका में रहेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
Priyanka Gandhi का यह जन्मदिन कांग्रेस के लिए केवल एक व्यक्तिगत मील का पत्थर नहीं, बल्कि यूपी की सत्ता के गलियारों में फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का एक रणनीतिक प्रस्थान बिंदु (Starting Point) बन गया है।







