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पुरकाजी बना गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल: जहीर फारूकी की अगुवाई में कांवड़ यात्रा में सेवा, सद्भाव और विकास का अनोखा संगम

मुजफ्फरनगर का पुरकाजी कांवड़ यात्रा में सेवा, विकास और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बनकर उभरा है। नगर पंचायत अध्यक्ष जहीर फारूकी की पहल से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं और सौहार्दपूर्ण वातावरण मिल रहा है।

by SYED BUSHRA
जुलाई 18, 2026
in उत्तर प्रदेश
Purkazi Kanwar Yatra Harmony
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 Muzaffarnagar:सावन का महीना आते ही उत्तर भारत का माहौल शिवमय हो जाता है। लाखों शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं। उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने के बाद कांवड़ियों का पहला बड़ा पड़ाव मुजफ्फरनगर जनपद का पुरकाजी कस्बा होता है। पिछले कुछ वर्षों में यह कस्बा केवल कांवड़ियों के स्वागत के लिए ही नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द की मिसाल के रूप में भी देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

इस बदलाव के केंद्र में हैं पुरकाजी नगर पंचायत के अध्यक्ष जहीर फारूकी, जिन्होंने विकास और सामाजिक सौहार्द को अपनी प्राथमिकता बनाते हुए पुरकाजी की तस्वीर बदलने का काम किया है। कांवड़ यात्रा के दौरान उनकी अगुवाई में नगर पंचायत, स्थानीय स्वयंसेवक और हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर जिस तरह शिवभक्तों की सेवा करते हैं, वह सांप्रदायिक सौहार्द का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

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भव्य स्वागत से शुरू होती है सेवा

हर वर्ष जब हरिद्वार से लौटते हुए कांवड़िए उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते हैं, तो पुरकाजी में उनका भव्य स्वागत किया जाता है। नगर पंचायत की ओर से स्वागत द्वार बनाए जाते हैं, पूरे कस्बे को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है और कांवड़ मार्ग को आकर्षक स्वरूप दिया जाता है। जगह-जगह पुष्प वर्षा, जलपान और विश्राम की व्यवस्था की जाती है ताकि लंबी यात्रा से थके श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरकाजी में प्रवेश करते ही कांवड़ियों को ऐसा महसूस होता है कि वे किसी धार्मिक उत्सव के बीच पहुंच गए हैं। हर तरफ “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजते हैं, वहीं सेवा में जुटे स्वयंसेवकों के चेहरे पर मुस्कान दिखाई देती है।

हिंदू-मुस्लिम टीम करती है सेवा

पुरकाजी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कांवड़ियों की सेवा किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रहती। नगर पंचायत अध्यक्ष जहीर फारूकी की पहल पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक टीम के रूप में मिलकर सेवा कार्यों में हिस्सा लेते हैं।

कहीं श्रद्धालुओं को पीने का पानी उपलब्ध कराया जाता है, तो कहीं चिकित्सा सहायता दी जाती है। भोजन, शर्बत और प्राथमिक उपचार से लेकर रास्ता बताने तक, हर कार्य में दोनों समुदाय के लोग साथ खड़े दिखाई देते हैं। यही तस्वीर पुरकाजी को देश के अन्य क्षेत्रों से अलग पहचान दिलाती है।

महिला कांवड़ियों के लिए विशेष व्यवस्था

बढ़ती महिला कांवड़ियों की संख्या को देखते हुए नगर पंचायत ने विशेष सुविधाओं पर भी ध्यान दिया है। यात्रा मार्ग पर महिलाओं के लिए अलग शौचालय बनाए गए हैं, जिनकी नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित किया जाता है।

इसके अलावा पेयजल, विश्राम स्थल और स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं को भी प्राथमिकता दी गई है ताकि महिला श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

रात में भी जगमगाता है कांवड़ मार्ग

कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात में भी यात्रा करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए नगर पंचायत की ओर से पूरे मार्ग पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की जाती है। एलईडी लाइटों और आकर्षक सजावट से पूरा पुरकाजी जगमगा उठता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां अंधेरे और अव्यवस्था की शिकायतें रहती थीं, वहीं अब रात में भी कांवड़ मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और रोशन दिखाई देता है।

विकास की नई पहचान बना पुरकाजी

जहीर फारूकी के नगर पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद केवल कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं में ही सुधार नहीं हुआ, बल्कि पूरे कस्बे के विकास को नई दिशा मिली। सड़कों का निर्माण, नालियों की व्यवस्था, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक स्थलों का सौंदर्यीकरण और नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम किया गया।

नगरवासियों का कहना है कि पहले जिन समस्याओं के समाधान के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ता था, अब उनका समयबद्ध निस्तारण हो रहा है। यही कारण है कि विकास कार्यों को लेकर लोगों में सकारात्मक माहौल देखने को मिलता है।

सौहार्द का मजबूत संदेश

देश में अक्सर सांप्रदायिक तनाव की खबरें सुर्खियां बनती हैं, लेकिन पुरकाजी की तस्वीर बिल्कुल अलग है। यहां कांवड़ यात्रा के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग शिवभक्तों की सेवा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जबकि हिंदू समुदाय भी इस सहयोग की खुले दिल से सराहना करता है।

यह परंपरा केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक विश्वास और भाईचारे की मजबूत नींव को भी दर्शाती है। पुरकाजी का यह मॉडल यह संदेश देता है कि धार्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

प्रशासन और नगर पंचायत का समन्वय

कांवड़ यात्रा के दौरान नगर पंचायत प्रशासन, पुलिस और जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करती है। ट्रैफिक व्यवस्था, सफाई, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इससे यात्रा सुचारु रूप से संचालित होती है और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलता है।

दूर-दूर तक हो रही सराहना

पुरकाजी की व्यवस्थाओं की चर्चा अब केवल मुजफ्फरनगर या पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। कांवड़िए भी यहां की व्यवस्था, साफ-सफाई और सेवा भावना की खुलकर प्रशंसा करते हैं। कई श्रद्धालु हर वर्ष पुरकाजी पहुंचकर यहां मिलने वाले सम्मान और अपनत्व का उल्लेख करते हैं।

एक संदेश पूरे देश के लिए

आज जब समाज में आपसी विश्वास और भाईचारे को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, तब पुरकाजी एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है। नगर पंचायत अध्यक्ष जहीर फारूकी की पहल ने यह साबित किया है कि विकास, सेवा और सामाजिक सौहार्द साथ-साथ चल सकते हैं।

कांवड़ यात्रा केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बन सकती है। पुरकाजी में दिखाई देने वाला यह दृश्य इसी सोच को मजबूत करता है। यहां कांवड़ियों का स्वागत केवल फूलों से नहीं, बल्कि दिलों से किया जाता है। यही कारण है कि आज पुरकाजी को कांवड़ यात्रा के सबसे अनुकरणीय पड़ावों में गिना जाने लगा है। विकास कार्यों, बेहतर नागरिक सुविधाओं और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल के साथ पुरकाजी ने यह संदेश दिया है कि यदि नेतृत्व सकारात्मक सोच वाला हो, तो एक छोटा कस्बा भी पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकता है।

Tags: Hindu Muslim UnityKanwar YatraZaheer Farooqui
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