Ram Mandir Donation Theft Investigation:राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले के आरोपी अविनाश शुक्ला से करीब 13 घंटे तक पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, इस दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिनके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में मिली जानकारी की अलग-अलग स्तर पर पुष्टि भी की जा रही है।
चोरी की रकम से खरीदी गई कार
पुलिस जांच के मुताबिक, अविनाश शुक्ला एक निजी नौकरी करता था और उसकी मासिक आय लगभग 12 से 13 हजार रुपये बताई गई है। आरोप है कि उसने कथित तौर पर चोरी की गई रकम से एक पुरानी कार खरीदी। शक से बचने के लिए कार अपने भाई अभिषेक के नाम पर दर्ज कराई गई, जो एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर कार को बरामद कर लिया है और उसे राम जन्मभूमि थाने में रखा गया है।
सीसीटीवी फुटेज बना अहम सबूत
पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में आरोपी खुद को निर्दोष बताता रहा। लेकिन जब उसके सामने करीब 45 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग रखी गई, तो जांच में नया मोड़ आया। अधिकारियों का दावा है कि फुटेज में आरोपी की गतिविधियां दिखाई देने के बाद उसने कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। फिलहाल पुलिस इन सभी तथ्यों की जांच कर रही है।
सुनसान जगह पर होता था पैसों का बंटवारा
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि इस मामले में शामिल लोग पहले से एक-दूसरे को जानते थे। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी लखनऊ-अयोध्या मार्ग पर स्थित 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के पास एक सुनसान स्थान पर मिलते थे। वहीं बैठकर कथित तौर पर चोरी की गई रकम का आपस में बंटवारा किया जाता था। पुलिस अब इस जानकारी के आधार पर अन्य साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
संपत्तियों की भी हो रही जांच
जांच एजेंसियों का कहना है कि चोरी की गई रकम का इस्तेमाल निजी संपत्तियां बनाने में भी किया गया हो सकता है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले के एक अन्य आरोपी लवकुश मिश्रा पर भी चोरी की रकम से मकान बनवाने का आरोप है। हालांकि, इन सभी तथ्यों की जांच अभी जारी है और पुलिस दस्तावेजों के जरिए पूरी जानकारी जुटा रही है।
जांच अभी जारी है
13 घंटे की पूछताछ पूरी होने के बाद पुलिस ने अविनाश शुक्ला को फिर से जेल भेज दिया है। अब जांच टीम पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर मामले के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी सबूतों और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
