Shivpal Yadav SP-AIMIM Alliance: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से बिसात बिछने लगी है। हाल ही में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की अटकलों ने जोर पकड़ा था, जिसे अब शिवपाल सिंह यादव ने पूरी तरह शांत कर दिया है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव को ओवैसी की जरूरत नहीं है और पार्टी का AIMIM के साथ हाथ मिलाने का कोई विचार नहीं है। Shivpal Yadav ने इन चर्चाओं को बेबुनियाद बताते हुए जोर दिया कि समाजवादी पार्टी का इतिहास अकेले दम पर बहुमत हासिल करने का रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आगामी चुनावों में भी जनता के सहयोग से सपा स्वतंत्र रूप से सरकार बनाएगी।
Lucknow, Uttar Pradesh: Samajwadi Party National General Secretary Shivpal Singh Yadav says, "…The BJP's treatment of saints and seers is just for show. This proves that under BJP rule, even saints are not respected. The Kumbh that happens in Prayagraj belongs to the saints,… pic.twitter.com/drkS5ir1a2
— IANS (@ians_india) January 22, 2026
सियासी अटकलों पर पूर्ण विराम
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए सपा छोटे दलों, विशेषकर मुस्लिम मतदाताओं पर प्रभाव रखने वाली AIMIM को साथ ले सकती है। हालांकि, शिवपाल यादव के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी अपनी वर्तमान रणनीति और ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर ही भरोसा कर रही है। Shivpal Yadav का बयान संगठन के भीतर उस आत्मविश्वास को दर्शाता है जो हालिया उपचुनावों और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के उत्साह से उपजा है।
सांसद के बयान से उपजा था भ्रम
गठबंधन की इन अटकलों को हवा सपा के ही सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर के एक बयान से मिली थी। सांसदों की एक बैठक के बाद जब राजभर से ओवैसी के साथ आने पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा था कि “भाजपा को हराने के लिए जो भी दल साथ आना चाहते हैं, उनका स्वागत है।” यह बयान इसलिए चौंकाने वाला था क्योंकि सपा नेतृत्व अक्सर AIMIM को ‘वोट कटवा’ पार्टी कहकर संबोधित करता रहा है। राजभर के इस लचीले रुख को सियासी जानकार एक रणनीतिक बदलाव मान रहे थे, जिसे अब शिवपाल ने खारिज कर दिया है।
बिहार के नतीजों का उत्तर प्रदेश पर असर
बिहार विधानसभा चुनाव में राजद (RJD) की हार ने उत्तर प्रदेश के विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है। तेजस्वी यादव की विफलता से सबक लेते हुए अखिलेश यादव फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। सपा नेतृत्व को डर है कि ओवैसी जैसी पार्टियों के साथ आने से ध्रुवीकरण की राजनीति तेज हो सकती है, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। यही कारण है कि सपा अब बाहरी दलों पर निर्भर रहने के बजाय अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।









