UGC Bill Political Tussle:यूजीसी बिल को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आने लगी है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बढ़ते विरोध ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के कुछ बड़े नेता खुलकर अपनी बात रख रहे हैं, जिससे अंदरूनी मतभेद की चर्चा शुरू हो गई है।
उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने सवर्ण समाज के विरोध को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि अगर ओबीसी और एससी वर्ग इस विरोध को अपने खिलाफ समझकर एकजुट हो गए, तो इसका असर चुनाव पर पड़ सकता है। उन्होंने सलाह दी कि इस मुद्दे को ज्यादा न बढ़ाया जाए और समझदारी से समाधान निकाला जाए।
बृजभूषण का जमीनी आकलन
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी इस बिल को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि गांवों में इस कानून का विरोध तेजी से फैल रहा है। उनके मुताबिक केवल सवर्ण समाज ही नहीं, बल्कि पिछड़ा और दलित वर्ग भी इस कानून से संतुष्ट नहीं है।
इसी बीच संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ दौरे के दौरान संतुलित बयान दिया। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन यदि किसी कानून में कमी है तो उसमें सुधार की गुंजाइश भी होनी चाहिए। उनके इस बयान को बीच का रास्ता माना जा रहा है।
अखिलेश का नया राजनीतिक दांव
वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश शुरू कर दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर “भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ” जैसे नारे के साथ नया संदेश दिया है।
अखिलेश यादव ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का एक वीडियो साझा करते हुए भाजपा पर संतों के अपमान का आरोप लगाया। माना जा रहा है कि सपा अब सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चलकर भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।
मिशन 2027 की तैयारी
2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी अब पेशेवर चुनावी रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार, चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था Indian Political Action Committee यानी आईपैक की टीम ने लखनऊ में अखिलेश यादव के सामने विस्तृत प्रस्तुति दी है।
इस प्रेजेंटेशन में चुनावी नारे, टिकट वितरण के लिए सर्वे, और डिजिटल प्रचार की रणनीति पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अखिलेश को आईपैक की सेवाएं लेने की सलाह दी थी।
आईपैक को कई राज्यों में चुनावी सफलता का श्रेय दिया जाता है। ऐसे में सपा 2027 में भाजपा को कड़ी चुनौती देने के लिए हर संभव तैयारी कर रही है।
