उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों काफी गरमाई हुई है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि किसी भी समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में कैबिनेट विस्तार का ऐलान हो सकता है। गुरुवार देर रात भी दिल्ली में भाजपा के बड़े नेताओं की लंबी बैठक चली, जिसमें यूपी के मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की गई।
दिल्ली में अहम बैठक
इस अहम बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष, यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री धर्मपाल सिंह मौजूद रहे। बैठक काफी लंबी चली और इसमें हर मंत्री के प्रदर्शन पर विस्तार से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि इसी बैठक में आगे की रणनीति लगभग तय कर ली गई है।
सीक्रेट रिपोर्ट से बढ़ी चिंता
इस पूरे मामले की शुरुआत 12 और 13 अप्रैल को लखनऊ में हुई थी। उस दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी सीएम के साथ बंद कमरे में लंबी बैठक की थी। तावड़े ने मंत्रियों के काम, जनता की प्रतिक्रिया और संगठन की रिपोर्ट को मिलाकर एक खास रिपोर्ट तैयार की। अब दिल्ली की बैठक में उसी रिपोर्ट पर अंतिम फैसला लिया गया है। यही वजह है कि कई मंत्रियों की चिंता बढ़ गई है।
2027 चुनाव पर नजर
भाजपा अब 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर रणनीति बना रही है। पार्टी चाहती है कि हर वर्ग और समाज का समर्थन उसे मिले। खासकर कुर्मी, पासी, शाक्य और मौर्य समाज को फिर से मजबूत तरीके से जोड़ने की कोशिश हो रही है। इन वर्गों के नेताओं को सरकार और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। साथ ही ब्राह्मण समाज को भी संतुलित रखने के लिए नए चेहरों पर विचार किया जा रहा है।
नए चेहरों को मिल सकता मौका
फिलहाल यूपी सरकार में करीब 6 मंत्रियों की जगह खाली है। लेकिन मामला सिर्फ इन पदों को भरने का नहीं है। चर्चा है कि जिन मंत्रियों का प्रदर्शन कमजोर रहा है, उन्हें हटाया जा सकता है। उनकी जगह नए और ऊर्जावान नेताओं को मौका दिया जाएगा। साथ ही पार्टी उन कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारी देना चाहती है, जो लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।
जल्द हो सकता है ऐलान
दिल्ली में हुई इस बड़ी बैठक के बाद माना जा रहा है कि अगले 10 से 15 दिनों के भीतर कैबिनेट विस्तार का ऐलान हो सकता है। इसके बाद नए मंत्री शपथ लेंगे और सरकार का नया रूप सामने आएगा। फिलहाल सभी की नजरें लखनऊ पर टिकी हैं।








