Digital Census:उत्तर प्रदेश में पहली बार जातिगत जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही जातिगत जनगणना अब जमीन पर उतरने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है। इस बार राज्य में होने वाली जनगणना केवल आबादी की गिनती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें लोगों की जाति, घर की स्थिति, सुविधाओं और सामाजिक ढांचे से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी दर्ज की जाएगी। खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएगी।
दो चरणों में होगी जनगणना की प्रक्रिया
जनगणना निदेशालय के अनुसार, इस बार की पूरी प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में ‘हाउस होल्ड लेवल’ पर जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें प्रगणक घर-घर जाकर मकान की स्थिति, निर्माण सामग्री, परिवार के सदस्यों और उपलब्ध सुविधाओं का डेटा इकट्ठा करेंगे।
आज से शुरू होगा घर-घर सर्वे
जनगणना का जमीनी काम शुरू होने के साथ ही प्रगणक घर-घर जाकर कुल 34 सवाल पूछेंगे। इसके लिए किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी, बल्कि परिवार के सदस्यों को सही जानकारी देनी होगी।
इन सवालों में मकान की बनावट, दीवार और छत की सामग्री, पेयजल की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति, बिजली कनेक्शन, खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाला ईंधन, इंटरनेट, मोबाइल, टीवी, लैपटॉप जैसी डिजिटल सुविधाएं और वाहन जैसी जानकारियां शामिल होंगी।
जातिगत डेटा क्यों है महत्वपूर्ण?
विशेषज्ञों का मानना है कि जातिगत जनगणना का डेटा सरकार की नीतियों और योजनाओं के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस वर्ग की वास्तविक आबादी कितनी है और किन समुदायों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।
इस डेटा के आधार पर भविष्य में संसाधनों का वितरण और कल्याणकारी योजनाओं की रणनीति अधिक सटीक बनाई जा सकेगी।
डिजिटल मॉडल से होगी पारदर्शिता
इस बार जनगणना में मोबाइल ऐप के जरिए डेटा दर्ज किया जाएगा। इससे जानकारी सीधे केंद्रीय सिस्टम तक पहुंचेगी और डेटा प्रोसेसिंग में समय कम लगेगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और त्रुटियों की संभावना भी कम होगी।
5.25 लाख कर्मचारी निभाएंगे जिम्मेदारी
राज्य सरकार ने इस बड़े अभियान के लिए करीब 5.25 लाख कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की तैयारी की है। इसमें मंडल आयुक्त, जिलाधिकारी, चार्ज अधिकारी, मास्टर ट्रेनर और लाखों प्रगणक शामिल होंगे। यह जनगणना आने वाले वर्षों में राज्य की सामाजिक और प्रशासनिक नीतियों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।


