Uttar Pradesh: सरकार ने सरकारी स्कूलों में आधुनिक तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी 75 जिलों के कम से कम 600 सरकारी स्कूलों में जल्द ही ‘ड्रीम लैब’ स्थापित की जाएंगी। इन लैब्स में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और 3D प्रिंटिंग जैसी नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आधुनिक तकनीक से जुड़ेंगे छात्र
अधिकारियों के मुताबिक, इन लैब्स को आधुनिक नवाचार और स्किल डेवलपमेंट सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां छात्रों को केवल सैद्धांतिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक और रोजगार आधारित तकनीकी प्रशिक्षण भी मिलेगा। सरकार का उद्देश्य छात्रों को इंडस्ट्री 4.0 की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
एमओयू पर हुए हस्ताक्षर
इस परियोजना के लिए समग्र शिक्षा (माध्यमिक), माध्यमिक शिक्षा विभाग और नेल्को लिमिटेड (टाटा एंटरप्राइज) सहित अन्य औद्योगिक समूहों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह साझेदारी छात्रों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सरकार ने बताया भविष्य में निवेश
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि यह केवल एक शैक्षणिक परियोजना नहीं, बल्कि राज्य के युवाओं के भविष्य में निवेश है। उनके अनुसार तेजी से बदलती औद्योगिक जरूरतों को देखते हुए छात्रों को नई तकनीकों और डिजिटल कौशल से लैस करना समय की मांग बन चुका है।
किन-किन विषयों की मिलेगी ट्रेनिंग?
‘ड्रीम लैब’ में छात्रों को AI, रोबोटिक्स और IoT के अलावा एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी आधारित इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि विज्ञान, अक्षय ऊर्जा, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डिजाइन थिंकिंग जैसे क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे छात्रों को भविष्य के रोजगार और स्टार्टअप अवसरों के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।
‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर होगा संचालन
स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने बताया कि इन लैब्स को ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा। उन्होंने मशीनों की गुणवत्ता, प्रशिक्षकों की क्षमता, छात्रों की नियमित भागीदारी और परिणाम आधारित निगरानी पर विशेष जोर दिया। खासकर आकांक्षी जिलों में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पहल सरकारी स्कूलों में तकनीकी शिक्षा के स्तर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्रों को भी आधुनिक तकनीकों की जानकारी और अनुभव मिल सकेगा, जो अब तक मुख्य रूप से निजी संस्थानों तक सीमित था।
