UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर पहले से ही भाजपा और विपक्ष आमने-सामने हैं। इसी बीच चंदौली में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल के एक बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मंत्री ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तीखी टिप्पणी की, जिसके बाद सपा ने इसका कड़ा विरोध जताया है।
कब्रिस्तान और श्मशान का मुद्दा फिर चर्चा में
चंदौली में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए रविंद्र जायसवाल ने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहने के समय का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल के लिए प्रस्ताव लाया गया था। मंत्री का दावा है कि उन्होंने उसी समय हिंदू श्मशान घाटों के लिए भी फंड देने की मांग की थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी मुद्दे पर बोलते हुए मंत्री ने अखिलेश यादव पर पक्षपात का आरोप लगाया। बयान के दौरान उन्होंने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। उनके इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है।
समाजवादी पार्टी ने किया पलटवार
रविंद्र जायसवाल की टिप्पणी पर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज काका ने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री और बड़े राजनीतिक नेता के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेताओं की भाषा लगातार असंसदीय होती जा रही है। सपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि यदि वे राजनीतिक शालीनता में विश्वास रखते हैं, तो मंत्री के खिलाफ उचित कार्रवाई करें। पार्टी का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं की भाषा संयमित और जिम्मेदार होनी चाहिए।
पीडीए राजनीति पर भी छिड़ी बहस
समाजवादी पार्टी ने इस बयान को पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समाज से भी जोड़ते हुए कहा कि अगर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो गलत संदेश जाएगा। पार्टी का कहना है कि वह इस मुद्दे को जनता के बीच उठाएगी और आने वाले समय में इसे राजनीतिक रूप से भी प्रमुख मुद्दा बनाएगी।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
रविंद्र जायसवाल वाराणसी शहर उत्तरी सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में स्टाम्प तथा पंजीयन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। माना जाता है कि पूर्वांचल की राजनीति में उनकी अच्छी पकड़ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकते हैं। एक ओर विपक्ष इस मुद्दे को सामाजिक और राजनीतिक सम्मान से जोड़कर उठा रहा है, वहीं भाजपा अपने पुराने राजनीतिक मुद्दों को सामने रखकर जनता तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विवाद पर राजनीति और तेज होने की संभावना है।









