School Vehicles: गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलते ही परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों के खिलाफ विशेष जांच अभियान शुरू कर दिया है। यह अभियान 15 जुलाई तक चलेगा, जिसके तहत बिना फिटनेस, बिना परमिट और सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पहले ही दिन 12 स्कूल वाहनों का चालान किया गया, जबकि दो वैन को सीज कर दिया गया।
इन स्कूलों के वाहनों पर हुई कार्रवाई
पहले दिन माउंट फोर्ट इंटरमीडिएट कॉलेज, महानगर, कार्मल कॉन्वेंट स्कूल, बादशाहनगर और एवरग्रीन पब्लिक स्कूल से जुड़े वाहनों की जांच की गई। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर परिवहन विभाग ने कार्रवाई की।
बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की सुरक्षित आवाजाही केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की भी बराबर की भूमिका है।
- परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस: नियमित जांच, चालान, परमिट रद्द करने और वाहन सीज करने की कार्रवाई।
- स्कूल प्रबंधन: केवल वैध परमिट और फिटनेस वाले वाहनों को ही संचालन की अनुमति देना।
- अभिभावक: निजी वैन की क्षमता, सुरक्षा उपकरण और दस्तावेजों की जांच करना।
स्कूल वाहनों के लिए जरूरी नियम
- 8 वर्ष से कम पुराने वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट 2 वर्ष तक वैध।
- 8 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट 1 वर्ष के लिए वैध।
- स्कूल वाहन का रंग पीला होना अनिवार्य।
- वाहन पर स्कूल का नाम और पता स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए।
- चालक के पास कम से कम 5 वर्ष पुराना वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए।
- वाहन में फर्स्ट एड बॉक्स, फायर एक्सटिंग्विशर और बैग रखने की रैक जैसी सुविधाएं अनिवार्य हैं।
‘मिशन भरोसा’ से बढ़ी निगरानी
परिवहन विभाग के अनुसार अब तक 6,164 स्कूली वाहन और 3,275 चालक ‘मिशन भरोसा’ पोर्टल पर पंजीकृत किए जा चुके हैं। सत्यापन के दौरान कई चालकों के खिलाफ आपराधिक मामले भी सामने आए थे, जिसके बाद निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
