Smart Prepaid Meter: बिजली बहाली में देरी पड़ी भारी, UPPCL पर नियामक आयोग ने लगाया 7.18 लाख रुपये का जुर्माना

स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज के बाद समय पर बिजली बहाल न करने पर विद्युत नियामक आयोग ने यूपी पावर कॉरपोरेशन पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के निर्देश भी दिए हैं।

UPPCL Smart Prepaid Meter Fine

UPPCL Smart Prepaid Meter Fine:उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना अब बिजली विभाग के लिए परेशानी का कारण बनती दिखाई दे रही है। लाखों उपभोक्ताओं के मीटर प्रीपेड मोड में बदलने और बिजली बहाल होने में देरी के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ गई थी। अब इस मामले में विद्युत नियामक आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है।
आयोग ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई रिचार्ज के बाद तय समय के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल न करने के कारण की गई है।

उपभोक्ता परिषद ने उठाया था मुद्दा

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग के सामने शिकायत दर्ज कराई। परिषद का आरोप था कि बिजली विभाग ने नियमों का पालन नहीं किया और उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी। शिकायत में कहा गया कि मार्च महीने में बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटरों को उपभोक्ताओं की सहमति के बिना पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में बदल दिया गया था। इसके बाद जैसे ही बैलेंस खत्म हुआ, कई घरों की बिजली आपूर्ति बंद हो गई।

रिचार्ज के बाद भी नहीं आई बिजली

सबसे ज्यादा परेशानी तब हुई जब उपभोक्ताओं ने अपने मीटर रिचार्ज कर लिए, लेकिन इसके बावजूद कई जगह बिजली आपूर्ति बहाल होने में काफी समय लग गया। कुछ मामलों में लोगों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ा। इस वजह से प्रदेश के विभिन्न इलाकों में लोगों में नाराजगी बढ़ गई और योजना को लेकर सवाल उठने लगे। बाद में शासन के हस्तक्षेप के बाद प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना को रोक दिया गया और कुछ राहत भी दी गई।

आयोग ने माना गंभीर लापरवाही

मामले की सुनवाई के दौरान विद्युत नियामक आयोग ने पाया कि बिजली कंपनियां निर्धारित सेवा मानकों का पालन नहीं कर सकीं। नियमों के अनुसार, मीटर रिचार्ज होने के दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल हो जानी चाहिए।
लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं हुआ। आयोग ने इसे उपभोक्ता सेवाओं में गंभीर लापरवाही माना और कार्रवाई करने का फैसला लिया।

कानून के तहत लगाया गया जुर्माना

आयोग ने बिजली विभाग पर विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाया है। नियमों के अनुसार, प्रत्येक उल्लंघन और देरी के आधार पर जुर्माने की गणना की गई, जिसके बाद कुल राशि 7.18 लाख रुपये तय की गई।
साथ ही आयोग ने निर्देश दिया कि यह राशि 15 दिनों के भीतर जमा कराई जाए।

भविष्य के लिए दिए निर्देश

आयोग ने कहा कि इस पूरे मामले की गहराई से समीक्षा करने की जरूरत है। इसके लिए मूल कारणों की पहचान कर ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे भविष्य में उपभोक्ताओं को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
आयोग का मानना है कि तकनीकी व्यवस्था को और मजबूत बनाकर बिजली सेवाओं को अधिक भरोसेमंद और उपभोक्ता हितैषी बनाया जा सकता है।

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