Varanasi GST Bribery Case: वाराणसी में भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता विभाग (विजिलेंस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जीएसटी विभाग की एक उपायुक्त को 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोप है कि जीएसटी रिटर्न से जुड़े एक मामले के निस्तारण के बदले उद्यमी से पहले एक लाख रुपये की मांग की गई थी, जो बाद में 50 हजार रुपये पर तय हुई। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने गोपनीय जांच कर ट्रैप की योजना बनाई और कथित तौर पर रिश्वत लेते समय अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।
जीएसटी रिटर्न के मामले से शुरू हुआ पूरा विवाद
जानकारी के अनुसार, वाराणसी के भेलूपुर क्षेत्र के निवासी और ब्लैक स्मिथ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अजय मौर्य को वर्ष 2023 के जीएसटी रिटर्न से संबंधित एक नोटिस 21 मार्च को मिला था। उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना स्पष्टीकरण पोर्टल पर अपलोड करने का प्रयास किया। तकनीकी दिक्कत आने के बाद 27 अप्रैल को प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बावजूद जीएसटी उपायुक्त अंबिका सिंह ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया। बाद में फाइल के निस्तारण के बदले कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई। उद्यमी ने इसे स्वीकार करने के बजाय विजिलेंस विभाग से शिकायत करने का फैसला किया।
विजिलेंस ने बिछाया जाल, लिफाफे के साथ हुई कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद सतर्कता विभाग ने मामले की गोपनीय जांच कराई। जांच में पर्याप्त आधार मिलने पर शासन से ट्रैप की अनुमति ली गई। तय योजना के अनुसार उद्यमी को निर्धारित रकम लेकर भेजा गया। आरोप है कि अधिकारी ने रुपये लिफाफे में रखकर देने को कहा। विजिलेंस टीम ने पहले से आवश्यक रासायनिक प्रक्रिया पूरी कर ली थी। जैसे ही कथित तौर पर अधिकारी ने लिफाफा अपने हाथ में लिया, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में, जांच जारी
गिरफ्तारी के बाद आरोपी जीएसटी उपायुक्त को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। जेल प्रशासन के अनुसार, उन्हें महिला बैरक में रखा गया, जहां शुरुआती समय में वह शांत रहीं और बहुत कम भोजन किया। वहीं, विजिलेंस विभाग पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य पहलुओं की जांच में जुटा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
उद्यमी ने कहा- भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी
उद्यमी अजय मौर्य ने कहा कि उन्होंने रिश्वत देने के बजाय कानून का सहारा लिया क्योंकि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उनका कहना है कि यदि कोई अधिकारी अपने पद का गलत इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने भविष्य में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर रहने की बात कही। दूसरी ओर, मामले में आरोपी अधिकारी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है। अदालत में आरोपों की सुनवाई और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।








