Kidney Donation by Wife: शादी के सात फेरों में सुख-दुख और बीमारी में साथ निभाने का वादा करने वाली पत्नी ने उसे हकीकत में साबित कर दिखाया। हाथरस के सिकंदराराऊ की रहने वाली मीना कुशवाहा ने अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना पति महेंद्र कुशवाहा को नई जिंदगी देने के लिए अपनी किडनी दान कर दी। इस फैसले ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया है। महेंद्र की मां ने अपनी बहू को देवी का दर्जा दिया है।
डेढ़ साल से दोनों किडनी खराब थीं
सिकंदराराऊ निवासी 32 वर्षीय महेंद्र कुशवाहा निजी स्कूल में शिक्षक हैं। करीब डेढ़ साल पहले जांच में पता चला कि उनकी दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं। इसके बाद से उनका लगातार डायलिसिस चल रहा था। बीमारी के चलते उनकी हालत लगातार कमजोर होती जा रही थी।
पति की हालत को देखते हुए मीना खुद उन्हें इलाज और डायलिसिस के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर जाती थीं। तीन बच्चों की जिम्मेदारी संभालने के साथ वह पति की देखभाल भी करती रहीं। डॉक्टरों ने महेंद्र की जिंदगी बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट को बेहतर विकल्प बताया।
आर्थिक स्थिति बनी बड़ी चुनौती
निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च अधिक होने के कारण परिवार के सामने आर्थिक संकट भी था। इसी दौरान उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने की जानकारी मिली। परिवार ने अस्पताल पहुंचकर पंजीकरण कराया।
जब डॉक्टरों ने किडनी दान करने की संभावना बताई तो मीना ने बिना देर किए पति को अपनी किडनी देने का फैसला कर लिया। मेडिकल जांच में वह किडनी डोनेशन के लिए उपयुक्त पाई गईं।
सफल हुआ किडनी ट्रांसप्लांट
शनिवार को एसएन मेडिकल कॉलेज में महेंद्र का सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। फिलहाल उन्हें आइसोलेट चैंबर में रखा गया है। किडनी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन के अनुसार, मरीज की हालत ठीक है। महेंद्र एसएन मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले पहले मरीज भी बने हैं।
‘पति से बड़ा किडनी का कोई मोल नहीं’
मीना ने बताया कि पति की दोनों किडनी खराब होने की जानकारी मिलने के बाद वह बेहद परेशान थीं। उनके मन में सिर्फ पति को बचाने का विचार था। जैसे ही किडनी दान करने की बात सामने आई, उन्होंने सबसे पहले हामी भरी।
उनका कहना है कि जीवनसाथी के लिए किया गया यह फैसला उनके लिए त्याग नहीं, बल्कि रिश्ते की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पति से बड़ा किडनी का कोई मोल नहीं है और उनकी जिंदगी की डोर उसी से जुड़ी है।
सास ने बहू को बताया देवी
महेंद्र के परिवार ने भी मीना के फैसले की सराहना की। उनके ससुर पप्पू सिंह ने बताया कि बेटे की बीमारी के बाद पूरा परिवार परेशान था। डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट को जिंदगी बचाने का विकल्प बताया तो बहू सबसे आगे आई।
उन्होंने कहा कि मीना ने उनके बेटे को नया जीवन दिया है। उनके लिए बहू किसी देवी से कम नहीं है।
