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RS Election Controversy: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, चुनाव आयोग ने भी खारिज की याचिका अंतिम आसरा सुप्रीम कोर्ट

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, जबकि बीजेपी नियमों के पालन की बात कर रही है।

by SYED BUSHRA
जून 11, 2026
in राजनीति
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Rajya Sabha Election MP Controversyमध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। बीजेपी का आरोप है कि नटराजन ने तेलंगाना में चल रहे एक लंबित मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र में नहीं दी थी।

वहीं कांग्रेस इस फैसले को गलत और पक्षपातपूर्ण बता रही है। पार्टी का कहना है कि बीजेपी ने पर्याप्त समर्थन न होने के बावजूद तीसरी राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए यह पूरा खेल रचा है।

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कांग्रेस क्यों थी सतर्क?

इस चुनाव में दांव पहले से ही काफी बड़ा था। बीजेपी ने महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतारकर सभी को चौंका दिया था। इसके बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु भेज दिया था ताकि किसी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके।

कांग्रेस की यह चिंता बेवजह नहीं थी। साल 2020 में कमलनाथ सरकार उस समय गिर गई थी जब ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस के 22 विधायक पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। इस घटना ने प्रदेश की राजनीति की दिशा बदल दी थी। इसी अनुभव को देखते हुए कांग्रेस इस बार अतिरिक्त सावधानी बरत रही थी।

बीजेपी के लिए क्या है गणित?

230 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के पास 164 विधायक हैं। इस संख्या के आधार पर पार्टी आसानी से दो राज्यसभा सीटें जीत सकती है। एक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोट चाहिए होते हैं।

दो उम्मीदवारों की जीत के बाद बीजेपी के पास 48 वोट बचते हैं। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार की जीत अतिरिक्त समर्थन, क्रॉस वोटिंग या विपक्षी विधायकों के मतदान से दूर रहने पर निर्भर करती है। यही वजह है कि तीसरी सीट सबसे ज्यादा चर्चा में रही।

कानूनी विवाद क्या है?

मामले का केंद्र यह सवाल है कि क्या हैदराबाद की अदालत से मिले नोटिस का उल्लेख चुनावी हलफनामे में करना जरूरी था या नहीं।

कांग्रेस के कानूनी प्रकोष्ठ से जुड़े अजय गुप्ता का कहना है कि यह कोई सामान्य आपराधिक मामला नहीं था। उनके अनुसार न तो नटराजन के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और न ही किसी अदालत ने आरोप तय किए थे। केवल एक नोटिस जारी हुआ था, जिसका जवाब पहले ही दिया जा चुका था।

दूसरी ओर बीजेपी का कहना है कि यदि किसी मामले में अदालत की ओर से नोटिस या समन जारी हो चुका है, तो उम्मीदवार को उसकी जानकारी देनी चाहिए। पार्टी का दावा है कि इस जानकारी को छिपाना नियमों का उल्लंघन है।

विधानसभा में हंगामा

इस मुद्दे को लेकर विधानसभा सचिवालय में काफी तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और तीखी बहस हुई। बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता, जिनमें राकेश सिंह और कैलाश विजयवर्गीय शामिल थे, पूरी प्रक्रिया के दौरान सचिवालय में मौजूद रहे।

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील विवेक तनखा ने कहा कि नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उनके मुताबिक केवल मुआवजे से जुड़ा नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब भी दिया जा चुका है।

चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट का रुख

कांग्रेस अब चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते राहत नहीं मिली तो तीनों खाली सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो सकते हैं।

उधर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेताओं ने इस मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई थी। उनका कहना है कि रिटर्निंग अधिकारी के सामने तथ्य स्वीकार किए गए थे, इसलिए लिया गया फैसला उचित है।

बीजेपी के उम्मीदवार कौन हैं?

बीजेपी की ओर से राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, प्रदेश इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को उम्मीदवार बनाया गया है। इनमें से तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि तीसरी सीट को लेकर पूरा राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ है।

Tags: Madhya Pradesh PoliticsNews1IndiaRajya Sabha Election
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SYED BUSHRA

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