Bihar Liquor Ban Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नई चर्चा शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजे जाने की अटकलों के बीच कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच आरजेडी की बागी नेता रितु जायसवाल की प्रतिक्रिया ने सियासी माहौल को और गरमा दिया है। रितु जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि बिहार में शराबबंदी को लेकर अब नई तरह की बहस शुरू हो गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह पूरा घटनाक्रम कहीं शराबबंदी खत्म करने की रणनीति का हिस्सा तो नहीं है। उनका कहना है कि पिछले कुछ दिनों में कई नेताओं के बयान सामने आए हैं, जिनमें कहा गया है कि शराबबंदी से राज्य को खास फायदा नहीं हुआ। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इस फैसले के कारण बिहार सरकार को राजस्व में नुकसान उठाना पड़ रहा है।
राज्य के खजाने पर दबाव
रितु जायसवाल ने अपने बयान में यह भी कहा कि इन दिनों यह चर्चा भी तेज हो गई है कि विधानसभा चुनाव से पहले जीविका समूह की महिलाओं को दी गई आर्थिक सहायता से राज्य के खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। ऐसे में कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए कोई नया रास्ता तलाश रही है। इसी संदर्भ में कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि शराबबंदी को खत्म करने की जमीन तैयार की जा रही है। हालांकि इस बारे में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।
नीतीश कुमार और शराबबंदी
रितु जायसवाल का कहना है कि बिहार में शराबबंदी का फैसला नीतीश कुमार की छवि और राजनीतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह कानून उनके बड़े फैसलों में से एक माना जाता है। इसी वजह से कई लोग यह मानते हैं कि जब तक नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति में हैं, तब तक इस कानून को हटाना आसान नहीं होगा।
रितु जायसवाल ने यह भी कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि इसी कारण उन्हें धीरे-धीरे राजनीति के केंद्र से दूर करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि यह केवल चर्चाएं हैं और इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
महिलाओं को मिली थी राहत
रितु जायसवाल ने शराबबंदी के सामाजिक प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से गांवों में रहने वाली कई महिलाओं को राहत मिलने की उम्मीद जगी थी।शराब के कारण होने वाले घरेलू झगड़े, हिंसा और परिवार की आर्थिक परेशानियों में कमी आने की बात कही जाती रही है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब शराबबंदी लागू होने के बाद भी अपराध की घटनाएं सामने आती रहती हैं, तो अगर खुलकर शराब की बिक्री शुरू हो जाए तो हालात कितने गंभीर हो सकते हैं। उनके इस बयान के बाद बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है।








