Muzaffarnagar Village Sealed:मुजफ्फरनगर के जानसठ क्षेत्र का गांव खलवाड़ा बुधवार को अचानक चर्चा में आ गया। ग्रामीणों ने गांव के सभी रास्तों को बल्लियों और रस्सियों से बंद कर दिया और आने-जाने पर रोक लगा दी। इसके बाद गांव में पूजा-पाठ और विशाल यज्ञ कराया गया। यज्ञ और प्रसाद वितरण पूरा होने के बाद ही रास्तों से अवरोध हटाए गए। इस पूरी कवायद को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से गांव में लोगों और पशुओं की अचानक मौतें हो रही हैं, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ है।
रास्ते किए बंद
बताया गया कि पिछले दो-तीन दिनों से ग्रामीणों के बीच यह बात प्रचारित की जा रही थी कि बुधवार को यज्ञ पूरा होने और प्रसाद वितरण तक गांव का कोई भी व्यक्ति बाहर नहीं जाएगा। बुधवार सुबह गांव के पढ़े-लिखे युवाओं ने सभी प्रमुख रास्तों पर बल्लियां और रस्सियां बांधकर आवागमन रोक दिया। अलग-अलग स्थानों पर युवाओं को निगरानी के लिए भी बैठाया गया। इस दौरान बाहर से आने वाले लोगों को गांव में प्रवेश नहीं दिया गया और ग्रामीणों को भी बाहर जाने से रोका गया।
मौतों से बढ़ा डर
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में काफी समय से कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कई लोगों का मानना है कि गांव को किसी की बुरी नजर लग गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, हाल के दिनों में बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और पशुओं की अचानक मौत की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने 18 वर्षीय रितेश, 19 वर्षीय तनु, एक नवजात शिशु, 60 वर्षीय वहीदा, 65 वर्षीय अभेराम, 60 वर्षीय सुलोचना, 35 वर्षीय बिल्लू, 40 वर्षीय कोमल और 41 वर्षीय संजय की मौत का जिक्र किया। इन घटनाओं को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।
खुशहाली के लिए यज्ञ
ग्रामीण बबलू ने बताया कि गांव में सुख-शांति और खुशहाली के लिए भूमिया माता के नाम पर यज्ञ कराया गया। बालेश के मुताबिक, ग्रामीणों को लगता है कि गांव पर किसी की बुरी नजर का असर है। इसी वजह से हवन कराने के साथ प्रसाद भी बांटा गया। सुदेश ने कहा कि पिछले एक साल में अकाल मौत की कई घटनाएं हुई हैं। वहीं सुमित ने दावा किया कि गांव में बड़ी संख्या में बछड़ों की भी अचानक मौत हो रही है और ग्रामीण इसे अपनी आंखों के सामने देख रहे हैं।
ज्योतिषियों से ली सलाह
ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन महीने से गांव में लगातार किसी न किसी की मौत की खबर सामने आ रही थी। इससे परेशान होकर कुछ ग्रामीण ज्योतिषियों के पास पहुंचे और इंसानों तथा पशुओं की मौत के बारे में जानकारी ली। ग्रामीणों का कहना है कि ज्योतिषियों की ओर से बताए गए उपायों के आधार पर गांव में यज्ञ और दूसरी धार्मिक गतिविधियां कराई गईं। हालांकि, ग्रामीणों ने इन उपायों और मौतों से जुड़ी दूसरी जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया।
यज्ञ के बाद खुला रास्ता
यज्ञ पूरा होने के बाद गांव में प्रसाद का वितरण किया गया। इसके बाद रास्तों पर लगाई गई बल्लियां और रस्सियां हटा दी गईं और सामान्य आवागमन शुरू हो गया। ग्रामीणों के इस कदम से पूरे इलाके में चर्चा है। हालांकि, गांव में हुई कथित अचानक मौतों के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, इसकी वैज्ञानिक या प्रशासनिक जांच की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इन घटनाओं के वास्तविक कारणों की जांच भी महत्वपूर्ण है।









