Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिले में संचालित एक दोना-पत्तल निर्माण फैक्ट्री में पिछले दो वर्षों से 13 मजदूरों को कथित रूप से बंधक बनाकर अमानवीय परिस्थितियों में रखा गया था। यूपी पुलिस और श्रम विभाग की संयुक्त कार्रवाई में इन मजदूरों को मुक्त कराया गया है।
नौकरी का झांसा देकर बनाया बंधक
पीड़ित मजदूरों के अनुसार उन्हें 8 हजार रुपये मासिक वेतन, अच्छा भोजन और अन्य सुविधाओं का लालच देकर फैक्ट्री में काम करने के लिए बुलाया गया था। लेकिन वहां पहुंचते ही उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र जब्त कर लिए गए। इसके बाद उन्हें फैक्ट्री परिसर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई और बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराया जाने लगा।
24 घंटे काम, विरोध करने पर बेरहमी
मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनसे लगातार 24 घंटे तक काम कराया जाता था। वेतन मांगने या काम से इनकार करने पर डंडों, हंटरों और नुकीले भालों से उनकी पिटाई की जाती थी। कई मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। आरोप है कि दिनभर की कड़ी मेहनत के बदले उन्हें केवल सूखी नमक-रोटी दी जाती थी।
भागने से रोकने के लिए पिटबुल कुत्तों का खौफ
फैक्ट्री परिसर में दो पिटबुल कुत्ते रखे गए थे। मजदूरों का कहना है कि यदि कोई भागने की कोशिश करता या विरोध करता, तो उस पर कुत्ते छोड़ने की धमकी दी जाती थी। इसी डर के कारण सभी मजदूर लंबे समय तक चुपचाप अत्याचार सहते रहे।
एक मजदूर की हिम्मत से खुला राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक दिन फैक्ट्री का मुख्य गेट खुला रह गया। मौका पाकर एक मजदूर वहां से भाग निकला और सीधे पुलिस के पास पहुंच गया। उसकी शिकायत पर पुलिस और श्रम विभाग की टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारकर 13 मजदूरों को मुक्त कराया।
एक मौत, दो मजदूर लापता
पुलिस जांच में सामने आया है कि कथित प्रताड़ना के चलते एक मजदूर की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य मजदूर लापता बताए जा रहे हैं। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मुख्य फैक्ट्री मालिक की तलाश जारी है। मामले में मानव तस्करी, बंधक बनाकर रखने और हत्या सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।









