Heart Attack के बाद कुछ मरीजों को अस्पताल में रहते हुए ही हल्की फिजिकल एक्टिविटी कराई जा सकती है। बेहतर स्थिति वाले मरीजों को बिस्तर से उठने, कमरे में थोड़ी दूरी चलने या रोजमर्रा की हल्की गतिविधियां धीरे-धीरे शुरू कराई जाती हैं।
हालांकि, हर मरीज की स्थिति अलग होती है। गंभीर हार्ट अटैक, कम पंपिंग फंक्शन या अन्य जोखिम होने पर रिकवरी और एक्सरसाइज की योजना अलग हो सकती है। इसलिए डिस्चार्ज के बाद खुद से वर्कआउट रूटीन बनाना उचित नहीं है।
हल्की वॉक से हो सकती है शुरुआत
कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, स्टेबल मरीजों को डॉक्टर की सलाह पर शुरुआत में हल्की वॉकिंग कराई जा सकती है। कुछ मरीजों के लिए शुरुआत छोटी अवधि की वॉक से हो सकती है और परेशानी न होने पर आने वाले हफ्तों में समय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
हालांकि, वॉक की अवधि हर मरीज के लिए एक जैसी नहीं हो सकती। उम्र, हार्ट की पंपिंग, एंजियोप्लास्टी या बायपास सर्जरी जैसी स्थितियों को ध्यान में रखकर डॉक्टर एक्सरसाइज तय कर सकते हैं।
दौड़ने और वजन उठाने से बचें
हार्ट अटैक के बाद अचानक तेज चलने, दौड़ने या भारी वजन उठाने जैसी गतिविधियां बिना चिकित्सकीय अनुमति के नहीं करनी चाहिए। रिकवरी के दौरान डॉक्टर की सलाह से धीरे-धीरे एक्सरसाइज की इंटेंसिटी बढ़ाई जा सकती है। स्टेशनरी साइकिल या अन्य एरोबिक एक्सरसाइज भी विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही शुरू करनी चाहिए।
एक्सरसाइज में इन बातों का रखें ध्यान
एक्सरसाइज शुरू करते ही तेज गति न पकड़ें और खत्म करते समय अचानक न रुकें। असहज महसूस होने पर जबरदस्ती वॉक जारी न रखें। खाने के तुरंत बाद वर्कआउट करने से बचें। पानी या अन्य तरल पदार्थ की मात्रा भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार रखें, खासकर यदि किसी मरीज को फ्लूड सीमित करने की सलाह दी गई हो।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
एक्सरसाइज के दौरान सीने में दर्द, दबाव या भारीपन, अचानक सांस फूलना, चक्कर, असामान्य कमजोरी, बहुत ज्यादा थकान, तेज या अनियमित धड़कन या ठंडा पसीना जैसे लक्षण हों तो गतिविधि रोककर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। दर्द हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक पहुंचने पर भी इसे गंभीरता से लेना चाहिए।










