Child Mobile Addiction: बच्चे के रोने या जिद करने पर उसे मोबाइल थमा देना आज कई घरों में आम बात बन चुका है। शुरुआत में इससे माता-पिता को राहत मिलती है, लेकिन धीरे-धीरे बच्चा मोबाइल का आदी होने लगता है। फोन नहीं मिलने पर गुस्सा, रोना, जिद और बेचैनी जैसी परेशानियां दिखाई देने लगती हैं।
दिल्ली और छह राज्यों में हुई पड़ताल में बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल से जुड़ी ऐसी समस्याएं सामने आई हैं। सरकार की ओर से भी बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम और डिजिटल निर्भरता को लेकर चिंता जताई गई है। 2021 में NCPCR ने छह राज्यों के 60 स्कूलों में 5,811 लोगों को शामिल कर मोबाइल और इंटरनेट डिवाइस के बच्चों पर प्रभाव का राष्ट्रीय अध्ययन कराया था।
बोलने में परेशानी
कई छोटे बच्चों में ज्यादा स्क्रीन देखने के बाद बोलने में देरी, आंखों से संपर्क कम होना, दूसरे बच्चों से घुलने-मिलने में कमी और जरूरत से ज्यादा सक्रिय रहने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। कुछ परिवार ऐसे बच्चों को थेरेपी के लिए लेकर पहुंच रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इन लक्षणों को देखकर सीधे किसी एक बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। मोबाइल और स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल इन व्यवहारों से जुड़ा हो सकता है, लेकिन हर बच्चे की स्थिति अलग होती है।
पढ़ाई पर असर
मोबाइल की लगातार आदत बच्चों के ध्यान और पढ़ाई को भी प्रभावित कर सकती है। छोटे-छोटे वीडियो और लगातार बदलती स्क्रीन बच्चों को तुरंत मनोरंजन देती है। इसके बाद लंबे समय तक किताब, कक्षा या किसी एक गतिविधि पर ध्यान लगाना मुश्किल महसूस हो सकता है।
2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कोयंबटूर के डॉक्टरों ने भी बच्चों में मोबाइल निर्भरता के कारण ध्यान की समस्या, नींद में बदलाव, सामाजिक दूरी और पढ़ाई के प्रदर्शन में गिरावट जैसे मामले बताए हैं।
इलाज में परिवार जरूरी
बच्चे की मोबाइल आदत को अचानक पूरी तरह बंद कर देना हर मामले में आसान नहीं होता। विशेषज्ञों के मुताबिक परिवार को धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करने, बच्चे के साथ समय बिताने और उसे खेल, बातचीत तथा दूसरी गतिविधियों से जोड़ने पर काम करना चाहिए।
थेरेपी की जरूरत होने पर विशेषज्ञ बच्चे के व्यवहार और उसकी जरूरत के हिसाब से तरीका तय करते हैं। दिल्ली एम्स की Behavioral Addictions Clinic में भी स्मार्टफोन, स्क्रीन, सोशल मीडिया और इंटरनेट के अत्यधिक इस्तेमाल से जुड़ी समस्याओं के लिए सेवाएं उपलब्ध हैं।
स्क्रीन से दूरी जरूरी
बच्चों के लिए मोबाइल पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन उसका इस्तेमाल किस उम्र में, कितनी देर और किस उद्देश्य से हो रहा है, यह महत्वपूर्ण है। पढ़ाई या जरूरी काम के अलावा लगातार मनोरंजन के लिए फोन देना आदत को बढ़ा सकता है।
इसलिए बच्चे के रोने पर हर बार मोबाइल देने के बजाय माता-पिता को उसके साथ बातचीत, खेल और दूसरी गतिविधियों के विकल्प तैयार करने चाहिए। समय रहते आदत पर ध्यान देने से समस्या बढ़ने से पहले उसे नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।






