अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को दी जाने वाली वित्तीय सहायता बंद करने का ऐलान किया है। ट्रंप के मुताबिक, इस साल के अंत तक अमेरिका इजरायल को मिलने वाली करीब 4 अरब डॉलर की मदद रोक देगा। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि इजरायल अब आर्थिक रूप से काफी मजबूत हो चुका है और उसे अमेरिकी सहायता पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। इस फैसले के बाद इजरायल की राजनीति में भी विरोध शुरू हो गया है।
ट्रंप ने क्यों लिया यह फैसला?
एक मीडिया इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका लंबे समय से इजरायल को अरबों डॉलर की सहायता दे रहा है, लेकिन अब इसे जारी रखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साल के अंत तक यह वित्तीय मदद बंद कर दी जाएगी।
ट्रंप का मानना है कि इजरायल अब एक समृद्ध देश है और अपने रक्षा उपकरणों तथा हथियारों की खरीद का खर्च खुद उठा सकता है। इसलिए अमेरिका पर उसकी निर्भरता खत्म होनी चाहिए।
यायर गोलान ने जताई नाराजगी
ट्रंप के इस ऐलान की इजरायल की डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष यायर गोलान ने आलोचना की है। वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरोधी राजनीतिक गुट से जुड़े हैं।
गोलान ने कहा कि यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब लंबे समय तक चले युद्ध के बाद इजरायल को अपनी रक्षा व्यवस्था मजबूत करने और हथियारों का भंडार दोबारा भरने के लिए भारी संसाधनों की जरूरत है।
नेतन्याहू पर लगाए गंभीर आरोप
यायर गोलान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इजरायल का रक्षा खर्च काफी बढ़ चुका है। लंबे युद्ध के बाद देश की वायु रक्षा क्षमताओं पर भी दबाव पड़ा है। ऐसे समय में अमेरिकी सहायता बंद होना इजरायल की सुरक्षा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
उन्होंने इस फैसले के लिए नेतन्याहू को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि एक जिम्मेदार प्रधानमंत्री को अमेरिकी सहायता बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए, न कि उसे खत्म होने देना चाहिए।
इजरायली जनता पर पड़ेगा आर्थिक बोझ?
गोलान के मुताबिक, अमेरिकी सहायता बंद होने से इजरायल की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने का आर्थिक बोझ वहां के नागरिकों पर पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे देश की सुरक्षा और आम लोगों के जीवन स्तर पर असर पड़ेगा।
उन्होंने नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि उनकी नीतियां इजरायल के सुरक्षा और आर्थिक संकट को गहरा कर रही हैं तथा देश के भविष्य को खतरे में डाल रही हैं।
अमेरिका-इजरायल संबंधों पर क्या होगा असर?
अमेरिका और इजरायल के बीच लंबे समय से रक्षा सहयोग और वित्तीय सहायता का समझौता रहा है। ऐसे में ट्रंप का यह ऐलान दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दे सकता है।
हालांकि, सहायता बंद करने की घोषणा के बाद इसके लागू होने की प्रक्रिया और मौजूदा रक्षा समझौते पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।























