ट्रंप ने कहा कि ईरान के सामने समझौता करने, आर्थिक रूप से कमजोर पड़ने या गंभीर सैन्य कार्रवाई का सामना करने जैसे विकल्प हैं। इससे पहले भी उन्होंने ईरान के नेताओं को समझौते के लिए चेतावनी दी थी। ट्रंप का कहना है कि ईरान को दोबारा लोगों की जान लेने का मौका नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में मौजूद देशों से ईरान को आर्थिक तौर पर पूरी तरह अलग-थलग करने में मदद करने की अपील की। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ किसी समझौते की संभावना अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद बन सकती है।
ईरान ने भी रखी शर्त
ट्रंप के बयान के बीच ईरान की तरफ से बातचीत का संकेत भी सामने आया है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के मुताबिक, अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोल सकता है। इसके बाद बातचीत दोबारा शुरू करने की बात कही गई है।
ईरान का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के राष्ट्रपति संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क में हैं। ईरानी अधिकारी ने बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अमेरिकी अधिकारियों के साथ कूटनीतिक बातचीत फिर शुरू करने का अधिकार दिया गया है।
बातचीत पर अमेरिका तैयार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा है कि अमेरिका ईरानी अधिकारियों से बातचीत के लिए तैयार है, अगर इससे सकारात्मक नतीजा निकलने की संभावना हो। हालांकि, ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र भाषण में ईरान के खिलाफ दबाव कम करने का संकेत नहीं दिखा।
इस बीच ईरान ने भी साफ किया है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा। ईरानी अधिकारियों के बयानों से संकेत मिलता है कि तेहरान एक तरफ सैन्य दबाव का जवाब देने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहता है।
होर्मुज पर बढ़ा दबाव
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का सीधा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ रहा है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। हाल के दिनों में यहां से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की संख्या में बड़ी कमी आई है। ऐसे में किसी भी समझौते या सैन्य तनाव का असर तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।









