Tuesday, January 20, 2026
  • Login
News1India
  • राष्ट्रीय
  • देश
  • बिहार चुनाव 2025
  • विदेश
  • राज्य ▼
    • दिल्ली
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • पंजाब
  • क्राइम
  • टेक्नोलॉजी
  • धर्म
  • मौसम
  • ऑटो
  • खेल
🔍
Home Breaking

केंद्र सरकार ने मैरिटल रेप को अपराध बनाने का किया विरोध, सुप्रीम कोर्ट में दायर किया हलफनामा

केंद्र सरकार ने मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग करने वाली याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है। सरकार का मानना है कि यह मुद्दा केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक है और इसे विवाह संस्था के भीतर के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप न करने की अपील की और कहा कि मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में लाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मौजूदा कानून इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए पर्याप्त हैं।

Mayank Yadav by Mayank Yadav
October 3, 2024
in Breaking
Marital Rape
491
SHARES
1.4k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

Marital Rape: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मैरिटल रेप (Marital Rape) को अपराध घोषित करने की याचिकाओं का विरोध करते हुए इसे एक कानूनी से ज्यादा सामाजिक मुद्दा बताया है। सरकार ने कहा कि विवाह के भीतर यौन संबंधों पर विचार करते समय मैरिटल रेप को अपराध बनाना उचित नहीं है, क्योंकि इसके लिए पहले से वैकल्पिक दंडात्मक उपाय मौजूद हैं। केंद्र ने यह भी तर्क दिया कि मैरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाने का मुद्दा सीधे तौर पर समाज पर प्रभाव डालता है, और इस पर किसी भी निर्णय से पहले सभी राज्यों और हितधारकों से व्यापक परामर्श की आवश्यकता है। सरकार ने यह रुख सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे के माध्यम से रखा, जिसमें उसने मौजूदा कानूनों का समर्थन किया, जो पति और पत्नी के (Marital Rape) बीच यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखते हैं।

केंद्र सरकार का तर्क: कानूनी से अधिक सामाजिक मुद्दा

सरकार ने अपनी दलील में कहा कि विवाह की संस्था का समाज पर गहरा असर पड़ता है और यह केवल कानूनी मुद्दा नहीं है। केंद्र ने इस बात पर जोर दिया कि बिना सभी राज्यों और संबंधित पक्षों की राय को ध्यान में रखे किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इस विषय पर केंद्र का मानना है कि विवाह के भीतर होने वाले यौन संबंध और विवाह के बाहर होने वाले यौन संबंधों में स्पष्ट अंतर है और इन दोनों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता।

#Breaking | Centre opposed pleas seeking criminalisation of #MaritalRape, stating that institution of marriage must be dealt with on a diff footing vis-a-vis other situations where women may face sexual violence. @boomlive_in pic.twitter.com/gYgJ70fCLY

— Ritika Jain (@riotsjain) October 3, 2024

केंद्र ने यह भी कहा कि भारतीय समाज में विवाह एक विशेष संस्था है, और इसके नियम और अपेक्षाएं उस पर आधारित हैं। सरकार का कहना है कि इस संदर्भ में मैरिटल रेप को अपराध घोषित करना समाज के मूलभूत ढांचे को प्रभावित कर सकता है।

मौजूदा दंडात्मक उपायों पर केंद्र की दलील

हलफनामे में केंद्र ने स्पष्ट किया कि  (Marital Rape) से निपटने के लिए मौजूदा कानून पहले से मौजूद हैं, जो विवाह के भीतर यौन संबंधों में सहमति के उल्लंघन को संभालने के लिए पर्याप्त हैं। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए का जिक्र किया गया, जो पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा पत्नी के प्रति क्रूरता को अपराध मानती है। इसके अलावा, घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानूनों का भी उल्लेख किया गया, जैसे घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005, जो महिलाओं की शील के खिलाफ किए गए कृत्यों को दंडित करता है।

केंद्र ने कहा कि विवाह के भीतर उत्पन्न यौन सहमति के मुद्दों को विशेष रूप से इस दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए कि यह विवाह संस्था के तहत हो रहा है, और इसे विवाह से बाहर के बलात्कार मामलों के समान नहीं माना जा सकता। सरकार ने स्पष्ट किया कि बलात्कार विरोधी कानूनों के तहत दंड असंगत हो सकता है और इस मामले में एक संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।

Himachal Pradesh : मुस्कान की मुस्कान ने किया कमाल, अपने ही कॉलेज में प्रोफेसर बनकर जीता कई लोगों का दिल

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं का विरोध

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में लाने से विवाह संस्था पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। याचिकाकर्ताओं द्वारा विवाह को केवल एक कानूनी संस्था मानने के दृष्टिकोण को केंद्र ने गलत ठहराया। सरकार ने यह भी कहा कि विवाह केवल एक कानूनी संबंध नहीं है, बल्कि इसका एक सामाजिक और भावनात्मक पहलू भी है, जिसमें यौन संबंध सिर्फ एक पहलू है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह इस मुद्दे पर हस्तक्षेप न करे, क्योंकि यह विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। सरकार ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का पालन किया गया है, क्योंकि विवाह के भीतर और विवाह के बाहर के यौन संबंध समान नहीं हो सकते। केंद्र का मानना है कि विवाह के भीतर यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए पहले से ही पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।

वैवाहिक सहमति: कानूनी और सामाजिक पहलू

केंद्र सरकार ने (Marital Rape) अपने हलफनामे में कहा कि विवाह में यौन संबंध बनाने की सहमति समाप्त नहीं होती, लेकिन इसे एक सामाजिक और वैधानिक रूप से अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इसके अलावा, सरकार ने कहा कि विवाहित महिला की सहमति की रक्षा के लिए पहले से ही कानून बनाए गए हैं, और इन्हें और अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता नहीं है। हलफनामे में यह भी तर्क दिया गया कि विवाह के भीतर के यौन संबंधों को विवाह के बाहर के यौन संबंधों से अलग तरीके से देखा जाना चाहिए, क्योंकि दोनों की परिस्थितियां अलग होती हैं।

RELATED POSTS

Silver Scam: कान्हा की नगरी में भरोसे पर भारी पड़ा लालच, 75 करोड़ की चांदी लेकर कारोबारी फरार, पुलिस जांच तेज

Silver Scam: कान्हा की नगरी में भरोसे पर भारी पड़ा लालच, 75 करोड़ की चांदी लेकर कारोबारी फरार, पुलिस जांच तेज

January 19, 2026
Nobel Prize Controversy: मचाडो द्वारा ट्रंप को पदक सौंपने पर मचा बवाल, किसने नोबेल पुरस्कार बांटा नहीं जा सकता नाहीं ट्रांसफर

Nobel Prize Controversy: मचाडो द्वारा ट्रंप को पदक सौंपने पर मचा बवाल, किसने नोबेल पुरस्कार बांटा नहीं जा सकता नाहीं ट्रांसफर

January 19, 2026

Marital Rape: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मैरिटल रेप (Marital Rape) को अपराध घोषित करने की याचिकाओं का विरोध करते हुए इसे एक कानूनी से ज्यादा सामाजिक मुद्दा बताया है। सरकार ने कहा कि विवाह के भीतर यौन संबंधों पर विचार करते समय मैरिटल रेप को अपराध बनाना उचित नहीं है, क्योंकि इसके लिए पहले से वैकल्पिक दंडात्मक उपाय मौजूद हैं। केंद्र ने यह भी तर्क दिया कि मैरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाने का मुद्दा सीधे तौर पर समाज पर प्रभाव डालता है, और इस पर किसी भी निर्णय से पहले सभी राज्यों और हितधारकों से व्यापक परामर्श की आवश्यकता है। सरकार ने यह रुख सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे के माध्यम से रखा, जिसमें उसने मौजूदा कानूनों का समर्थन किया, जो पति और पत्नी के (Marital Rape) बीच यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखते हैं।

केंद्र सरकार का तर्क: कानूनी से अधिक सामाजिक मुद्दा

सरकार ने अपनी दलील में कहा कि विवाह की संस्था का समाज पर गहरा असर पड़ता है और यह केवल कानूनी मुद्दा नहीं है। केंद्र ने इस बात पर जोर दिया कि बिना सभी राज्यों और संबंधित पक्षों की राय को ध्यान में रखे किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इस विषय पर केंद्र का मानना है कि विवाह के भीतर होने वाले यौन संबंध और विवाह के बाहर होने वाले यौन संबंधों में स्पष्ट अंतर है और इन दोनों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता।

#Breaking | Centre opposed pleas seeking criminalisation of #MaritalRape, stating that institution of marriage must be dealt with on a diff footing vis-a-vis other situations where women may face sexual violence. @boomlive_in pic.twitter.com/gYgJ70fCLY

— Ritika Jain (@riotsjain) October 3, 2024

केंद्र ने यह भी कहा कि भारतीय समाज में विवाह एक विशेष संस्था है, और इसके नियम और अपेक्षाएं उस पर आधारित हैं। सरकार का कहना है कि इस संदर्भ में मैरिटल रेप को अपराध घोषित करना समाज के मूलभूत ढांचे को प्रभावित कर सकता है।

मौजूदा दंडात्मक उपायों पर केंद्र की दलील

हलफनामे में केंद्र ने स्पष्ट किया कि  (Marital Rape) से निपटने के लिए मौजूदा कानून पहले से मौजूद हैं, जो विवाह के भीतर यौन संबंधों में सहमति के उल्लंघन को संभालने के लिए पर्याप्त हैं। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए का जिक्र किया गया, जो पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा पत्नी के प्रति क्रूरता को अपराध मानती है। इसके अलावा, घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानूनों का भी उल्लेख किया गया, जैसे घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005, जो महिलाओं की शील के खिलाफ किए गए कृत्यों को दंडित करता है।

केंद्र ने कहा कि विवाह के भीतर उत्पन्न यौन सहमति के मुद्दों को विशेष रूप से इस दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए कि यह विवाह संस्था के तहत हो रहा है, और इसे विवाह से बाहर के बलात्कार मामलों के समान नहीं माना जा सकता। सरकार ने स्पष्ट किया कि बलात्कार विरोधी कानूनों के तहत दंड असंगत हो सकता है और इस मामले में एक संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।

Himachal Pradesh : मुस्कान की मुस्कान ने किया कमाल, अपने ही कॉलेज में प्रोफेसर बनकर जीता कई लोगों का दिल

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं का विरोध

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में लाने से विवाह संस्था पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। याचिकाकर्ताओं द्वारा विवाह को केवल एक कानूनी संस्था मानने के दृष्टिकोण को केंद्र ने गलत ठहराया। सरकार ने यह भी कहा कि विवाह केवल एक कानूनी संबंध नहीं है, बल्कि इसका एक सामाजिक और भावनात्मक पहलू भी है, जिसमें यौन संबंध सिर्फ एक पहलू है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह इस मुद्दे पर हस्तक्षेप न करे, क्योंकि यह विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। सरकार ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का पालन किया गया है, क्योंकि विवाह के भीतर और विवाह के बाहर के यौन संबंध समान नहीं हो सकते। केंद्र का मानना है कि विवाह के भीतर यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए पहले से ही पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।

वैवाहिक सहमति: कानूनी और सामाजिक पहलू

केंद्र सरकार ने (Marital Rape) अपने हलफनामे में कहा कि विवाह में यौन संबंध बनाने की सहमति समाप्त नहीं होती, लेकिन इसे एक सामाजिक और वैधानिक रूप से अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इसके अलावा, सरकार ने कहा कि विवाहित महिला की सहमति की रक्षा के लिए पहले से ही कानून बनाए गए हैं, और इन्हें और अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता नहीं है। हलफनामे में यह भी तर्क दिया गया कि विवाह के भीतर के यौन संबंधों को विवाह के बाहर के यौन संबंधों से अलग तरीके से देखा जाना चाहिए, क्योंकि दोनों की परिस्थितियां अलग होती हैं।

Share196Tweet123Share49
Mayank Yadav

Mayank Yadav

Related Posts

Silver Scam: कान्हा की नगरी में भरोसे पर भारी पड़ा लालच, 75 करोड़ की चांदी लेकर कारोबारी फरार, पुलिस जांच तेज

Silver Scam: कान्हा की नगरी में भरोसे पर भारी पड़ा लालच, 75 करोड़ की चांदी लेकर कारोबारी फरार, पुलिस जांच तेज

by SYED BUSHRA
January 19, 2026

Mathura Silver Scam Shocks Market: मथुरा में सराफा बाजार इन दिनों भारी तनाव में है। शहर के सराफा कारोबार से...

Nobel Prize Controversy: मचाडो द्वारा ट्रंप को पदक सौंपने पर मचा बवाल, किसने नोबेल पुरस्कार बांटा नहीं जा सकता नाहीं ट्रांसफर

Nobel Prize Controversy: मचाडो द्वारा ट्रंप को पदक सौंपने पर मचा बवाल, किसने नोबेल पुरस्कार बांटा नहीं जा सकता नाहीं ट्रांसफर

by SYED BUSHRA
January 19, 2026

Nobel Peace Prize Controversy Explained: वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो द्वारा अपना नोबेल...

INDO–US Controversy: कौन है पीटर नवारो जिसके AI और बिजली खर्च को लेकर बेतुके बयान से बढ़ा विवाद

INDO–US Controversy: कौन है पीटर नवारो जिसके AI और बिजली खर्च को लेकर बेतुके बयान से बढ़ा विवाद

by SYED BUSHRA
January 19, 2026

Trump Aide Navarro Statement Controversy: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले पीटर नवारो एक बार फिर...

Political Wedding: पाकिस्तान की हाई-प्रोफाइल शादी, दुल्हन के भारतीय डिजाइनर के ड्रेस पर मचा बवाल ,सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Political Wedding: पाकिस्तान की हाई-प्रोफाइल शादी, दुल्हन के भारतीय डिजाइनर के ड्रेस पर मचा बवाल ,सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

by SYED BUSHRA
January 19, 2026

Pakistan Political Wedding Sparks Fashion Debate: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के पोते और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़...

Air Pollution:  एक बार फिर गाजियाबाद बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, हवा बनी ज़हर, AQI 458 पहुंचा, GRAP-4 लागू

Air Pollution: एक बार फिर गाजियाबाद बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, हवा बनी ज़हर, AQI 458 पहुंचा, GRAP-4 लागू

by SYED BUSHRA
January 19, 2026

Ghaziabad Air Pollution Crisis: रविवार को गाजियाबाद एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया। सर्दी बढ़ने के...

Next Post
Kalkaji

दिल्ली के कालकाजी में नवरात्रि पूजा के दौरान बड़ा हादसा, पंडाल में करंट उतरने से एक छात्र की मौत, सात घायल

Amethi

अमेठी में खून की होली: टीचर, पत्नी और दो बच्चों की निर्मम हत्या, घर में घुसकर बरसाईं गोलियां

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

News1India

Copyright © 2025 New1India

Navigate Site

  • About us
  • Privacy Policy
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • राष्ट्रीय
  • देश
  • बिहार चुनाव 2025
  • विदेश
  • राज्य
    • दिल्ली
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • पंजाब
  • क्राइम
  • टेक्नोलॉजी
  • धर्म
  • मौसम
  • ऑटो
  • खेल

Copyright © 2025 New1India

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist