Satpal’s Journey Into Crime: मुजफ्फरनगर में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए सतपाल उर्फ सत्तू की कहानी काफी अलग और चौंकाने वाली बताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सतपाल कभी पंजाब की रणजी टीम का हिस्सा रहा था। वह तेज गेंदबाज के रूप में क्रिकेट खेलता था और आगे बढ़ने के सपने देख रहा था। लेकिन समय के साथ उसका जीवन पूरी तरह बदल गया और वह अपराध की दुनिया में पहुंच गया।
पहला मामला और अपराध की राह
पुलिस के अनुसार, सतपाल के खिलाफ पहला मामला वर्ष 2001 में चंडीगढ़ में दर्ज हुआ था। उस पर सार्वजनिक स्थान पर लापरवाही से वाहन चलाने का आरोप लगा था। इसके बाद उसका नाम लूट, हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर मामलों में सामने आने लगा। धीरे-धीरे वह संगठित अपराध से जुड़ गया और कई राज्यों में सक्रिय रहने लगा।
अपराध जगत में बढ़ता प्रभाव
जांच में सामने आया कि सतपाल कारोबारियों और अन्य लोगों से कथित रूप से उगाही और रंगदारी मांगने के मामलों में भी शामिल रहा। पुलिस का कहना है कि उसने कई बार अपनी पहचान बदलकर भी लोगों को गुमराह किया। लुधियाना जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद वह खुद को सेवानिवृत्त फौजी अनिकेत बताकर रह रहा था।
युवराज सिंह के पिता पर हमले का आरोप
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सतपाल का नाम पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह पर हुए हमले के मामले में भी सामने आया था। हालांकि इस मामले में विस्तृत जानकारी जांच रिकॉर्ड के आधार पर सामने आई है। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ाया नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, अपराध की दुनिया में आने के बाद वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ शार्प शूटरों के संपर्क में आया। इसके बाद उसने कई वारदातों को अंजाम दिया। मेरठ में हुई एक बड़ी डकैती में भी उसका नाम सामने आया था। उस मामले में उसकी पत्नी और कुछ अन्य लोग भी गिरफ्तार हुए थे।
जेल में बिताए कई साल
सतपाल ने कई वर्षों तक अलग-अलग जेलों में समय बिताया। वह लंबे समय तक मुजफ्फरनगर और मेरठ की जेलों में बंद रहा। पुलिस का दावा है कि जेल में रहते हुए भी उसने अपना प्रभाव बनाए रखा और कई लोगों से संपर्क बनाए रखे।
पत्नी के प्रेमी की हत्या का आरोप
पुलिस जांच के मुताबिक, जमानत पर बाहर आने के बाद उसे अपनी पत्नी और उसके कथित प्रेमी से जुड़ी कुछ तस्वीरें और वीडियो मिले। इसके बाद उस पर पत्नी के प्रेमी की हत्या करने का आरोप लगा। इस मामले में उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
अस्पताल से फरार होने के बाद तलाश
बताया गया कि बीमारी का हवाला देकर वह कई बार अस्पताल में भर्ती हुआ। बाद में इलाज के दौरान पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया। इसके बाद पंजाब, मेरठ, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर सहित कई जिलों की पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई थी।









