Big Decision: नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच शनिवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप रहे हैं। इसके कुछ ही देर बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से अपना बायो भी हटा दिया। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अचानक लिया गया फैसला नहीं था। इसके पीछे शुक्रवार सुबह से शनिवार दोपहर तक करीब 24 घंटे का ऐसा घटनाक्रम रहा, जिसने सरकार को एक बड़ा और मुश्किल राजनीतिक फैसला लेने पर मजबूर कर दिया।
पहले लगा था हालात संभल जाएंगे
शुक्रवार सुबह तक केंद्र सरकार को उम्मीद थी कि पेपर लीक मामले में उठाए गए कदमों से हालात धीरे-धीरे काबू में आ जाएंगे। सरकार की ओर से उच्च शिक्षा सचिव को हटाया जा चुका था, जबकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA के 47 अधिकारियों को निलंबित करने की कार्रवाई भी सामने आई थी। इसके अलावा पेपर लीक को रोकने के लिए नए कानून को मंजूरी देने और मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने जैसे फैसलों का भी ऐलान किया गया। सरकार को उम्मीद थी कि इन कदमों के बाद छात्रों का विरोध कमजोर पड़ेगा और आंदोलन धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा।
विपक्ष ने पकड़ लिया था मुद्दा
लेकिन सरकार के भीतर हालात को लेकर मंथन जारी था। सत्ता पक्ष के रणनीतिकारों को आशंका थी कि विपक्षी दल नीट पेपर लीक के मुद्दे को केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक हथियार बना सकते हैं। विपक्ष लगातार छात्रों और युवाओं के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था। ऐसे में यह चिंता बढ़ने लगी कि अगर आंदोलन लंबा चला तो इसका राजनीतिक नुकसान भी हो सकता है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए भी इस पूरे विवाद को गंभीरता से लिया गया।
बड़े नेताओं की भी बढ़ी सक्रियता
बताया जा रहा है कि भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए थे। सरकार की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को छात्रों के साथ बातचीत और स्थिति को संभालने की जिम्मेदारी दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया के जरिए दो बार छात्रों को भरोसा दिलाने की कोशिश की। बावजूद इसके, शनिवार तक सरकार को महसूस होने लगा कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई और नई घोषणाओं से छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है।
खुफिया रिपोर्ट से बढ़ी चिंता
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक घटनाक्रम तेजी से बदला। दिल्ली के जंतर-मंतर के अलावा देश के कई हिस्सों में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज होने की खबरें सामने आईं। इसी बीच खुफिया एजेंसियों ने स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय को अहम जानकारी दी। इनपुट में आशंका जताई गई कि अगर समय रहते स्थिति को नहीं संभाला गया तो आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और ज्यादा व्यापक हो सकते हैं। सरकार के भीतर यह चिंता भी सामने आई कि आंदोलन के दौरान असामाजिक या राष्ट्रविरोधी तत्व माहौल का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
दोपहर में आया सबसे बड़ा फैसला
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे मामले की कमान अपने हाथों में ले ली। सरकार के भीतर लगातार बैठकों और बातचीत के बाद यह महसूस किया गया कि अब केवल प्रशासनिक फैसलों से स्थिति संभालना मुश्किल है। बढ़ते छात्र विरोध, विपक्ष के राजनीतिक दबाव और संभावित चुनावी असर को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाने पर सहमति बनी। इसके बाद शनिवार दोपहर करीब 2 बजे धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस तरह नीट पेपर लीक विवाद में शुरू हुई राजनीतिक हलचल आखिरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पहुंच गई।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि सरकार की ओर से उठाए गए अगले कदम क्या होंगे और क्या इससे छात्रों का विरोध पूरी तरह शांत हो पाएगा।









