स्वस्थ रहने के लिए केवल बीमारी का इलाज कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई गंभीर बीमारियां शुरुआती चरण में बिना किसी लक्षण के विकसित होती हैं। ऐसे में Health Checkup: नियमित हेल्थ चेकअप से इनका समय रहते पता लगाकर इलाज शुरू किया जा सकता है।
हर साल कराएं ये जरूरी जांच
विशेषज्ञों के अनुसार हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर की जांच जरूर करानी चाहिए। इसके अलावा फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट से डायबिटीज और प्री-डायबिटीज की समय रहते पहचान की जा सकती है। वहीं CBC (कम्प्लीट ब्लड काउंट) टेस्ट शरीर में खून की कमी, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी देता है।
लिवर, किडनी और विटामिन की जांच भी जरूरी
डॉक्टर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT), किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT), थायरॉयड प्रोफाइल, हीमोग्लोबिन, विटामिन D और विटामिन B12 की जांच भी साल में एक बार कराने की सलाह देते हैं। इन जांचों से फैटी लिवर, किडनी की कार्यक्षमता, थायरॉयड संबंधी गड़बड़ी, एनीमिया और शरीर में विटामिन की कमी का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
हार्ट और इमेजिंग टेस्ट कब कराएं?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अधिक वजन वाले लोगों, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीजों को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। जरूरत के अनुसार चेस्ट एक्स-रे और पेट का अल्ट्रासाउंड भी कराया जा सकता है। जिन लोगों में हृदय रोग का खतरा अधिक है, उन्हें 40 वर्ष की उम्र के बाद और सामान्य जोखिम वाले लोगों को 50 वर्ष की उम्र के बाद हर पांच साल में CT कोरोनरी एंजियोग्राफी और CT कैल्शियम स्कोर टेस्ट कराने पर विचार करना चाहिए। इसके अलावा 40 वर्ष की उम्र के बाद ECG, इकोकार्डियोग्राफी और स्ट्रेस टेस्ट भी उपयोगी हो सकते हैं।
महिलाओं के लिए विशेष जांच
महिलाओं को सर्विक्स कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए हर तीन वर्ष में पैप स्मीयर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। वहीं 40 वर्ष की उम्र के बाद हर साल मैमोग्राफी कराना ब्रेस्ट कैंसर की समय रहते पहचान में मदद कर सकता है। जिन महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक हो, उन्हें 50 वर्ष की उम्र के बाद DEXA बोन डेंसिटी स्कैन भी कराना चाहिए।
CT स्कैन हर किसी के लिए जरूरी नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे शरीर का CT स्कैन सामान्य हेल्थ चेकअप का हिस्सा नहीं होता, क्योंकि इसमें रेडिएशन का उपयोग होता है। वहीं MRI में रेडिएशन नहीं होता और कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे कैंसर का अधिक जोखिम होने पर, डॉक्टर की सलाह पर पूरे शरीर का MRI कराया जा सकता है। यदि किसी जांच में असामान्यता मिले तो आगे की जांच और उपचार के लिए चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।




