Iran US Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान भी चर्चा में है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम अब खत्म हो चुका है और अमेरिका अब किसी नए समझौते की इच्छा नहीं रखता। हालांकि मौजूदा सैन्य कार्रवाई और राजनीतिक हालात को लेकर दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी कि 7 जुलाई को ईरान के कई ठिकानों पर नए सिरे से हवाई हमले किए गए।
80 से ज्यादा ठिकानों पर हमले का दावा
अमेरिकी सेना के अनुसार, इस अभियान में सटीक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए 80 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। दावा किया गया कि इन हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, कमांड नेटवर्क, तटीय रडार केंद्र, एंटी-शिप मिसाइल क्षमता और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास मौजूद कई सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया गया।
अमेरिका का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल समुद्री मार्गों और व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा रहा था। हालांकि ईरान ने इन दावों पर अलग रुख अपनाया है।
ईरान ने अमेरिकी ड्रोन गिराने का किया दावा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बुशहर प्रांत के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के जवाब में की गई।
हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। दोनों देशों की ओर से लगातार अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण बनी हुई है।
अमेरिका ने आगे भी कार्रवाई के दिए संकेत
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले समय में भी कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मौजूदा सैन्य कार्रवाई पहले की तुलना में कहीं अधिक बड़े स्तर पर की गई है। अधिकारियों का दावा है कि इसका उद्देश्य केवल जवाब देना नहीं, बल्कि ईरान को कड़ा संदेश देना भी है। फिलहाल क्षेत्र की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार हालात पर नजर रख रहा है।







