Israel Political Crisis :करीब 19 साल तक अलग-अलग कार्यकाल में प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में है। 27 अक्टूबर के चुनाव में उनका गठबंधन सबसे बड़ा गुट बना, लेकिन बहुमत से दूर रह गया। गादी आइसेनकोट भी बहुमत से दूर रहे।
राष्ट्रपति का फैसला
राष्ट्रपति आइजक हरजोग ने शनिवार को आइसेनकोट को सरकार बनाने का मौका देने की घोषणा की। आइसेनकोट को संसद में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जुटाना होगा।
किसे मिला समर्थन
राष्ट्रपति ने 4 और 5 नवंबर को दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। 67 सांसदों का प्रतिनिधित्व करने वाले गुटों ने आइसेनकोट की सिफारिश की, जबकि 46 सांसदों के प्रतिनिधियों ने नेतन्याहू का समर्थन किया। सात सांसदों वाले गुट ने किसी का नाम नहीं सुझाया। राष्ट्रपति ने आइसेनकोट को बेहतर विकल्प माना।
सीटों का गणित
इजरायल की संसद नेसेट में 120 सीटें हैं और बहुमत के लिए 61 सांसद चाहिए। चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 और आइसेनकोट की याशर पार्टी को 21 सीटें मिलीं। गठबंधन के हिसाब से नेतन्याहू खेमे के पास 53, आइसेनकोट खेमे के पास 48 और अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं। दोनों बहुमत से दूर हैं।
अरब दलों का पेच
आइसेनकोट के लिए अरब पार्टियों का समर्थन अहम हो सकता है। इन दलों ने उनके नाम की सिफारिश की है, लेकिन उनका गठबंधन अरब दलों को सरकार में शामिल करने को लेकर सतर्क है। इनमें हमास को आतंकी संगठन मानना और उसे खत्म करने की नीति का समर्थन शामिल है। पार्टी ने लिकुड सदस्यों से कट्टरपंथी सहयोगियों से दूरी बनाने को कहा है।
नेतन्याहू का हमला
फैसले से पहले नेतन्याहू ने राष्ट्रीय एकता की सरकार बनाने की अपील की। उन्होंने ऐसी सरकार के खिलाफ चेताया जिसे उनके मुताबिक आतंकवाद समर्थक दलों का सहारा मिले। उनका इशारा अरब पार्टियों की ओर माना गया। वहीं, आइसेनकोट चाहते हैं कि सरकार में शामिल दल उनकी पार्टी के बुनियादी सिद्धांतों से सहमत हों। सुरक्षा नीति और विचारधारा पर भी सहमति जरूरी होगी।
कौन हैं आइसेनकोट
उन्होंने सेना में 41 साल सेवा की और 2015 में इजरायली सेना के प्रमुख बने। 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद बनी युद्ध कैबिनेट में भी वह शामिल थे। गाजा अभियान के दौरान उनके बेटे गैल की मौत हो गई थी। अब वह याशर पार्टी के नेता हैं।
बहुमत की चुनौती
कानून के मुताबिक, आइसेनकोट को सरकार बनाने के लिए 28 दिन मिलेंगे। राष्ट्रपति जरूरत पड़ने पर 14 दिन और दे सकते हैं। उन्हें अलग-अलग विचारधारा वाले दलों में सहमति बनानी होगी। अरब दलों का समर्थन मददगार हो सकता है, लेकिन गठबंधन में इसका विरोध भी है। नाकाम रहने पर राष्ट्रपति किसी दूसरे सांसद को मौका दे सकते हैं। ऐसे में नेतन्याहू को फिर अवसर मिल सकता है।















