Totapuri Mango Farming: भारत में आम की कई किस्मों की खेती की जाती है, लेकिन तोतापुरी आम अपनी अलग पहचान रखता है। इसका उपयोग ताजा खाने के साथ-साथ जूस, पल्प, शेक और अचार बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है। प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में लगातार मांग रहने के कारण यह किसानों के लिए अच्छी आय देने वाली किस्म मानी जाती है।
इन राज्यों में होती है सबसे ज्यादा खेती
तोतापुरी आम की खेती मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु में की जाती है। इसके अलावा महाराष्ट्र और गुजरात में भी इसकी अच्छी पैदावार होती है। कई क्षेत्रों में पल्प प्रोसेसिंग यूनिट्स होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होती है और बेहतर कीमत भी मिलती है।
स्वाद और पहचान
तोतापुरी आम का स्वाद अन्य मीठी किस्मों की तुलना में हल्का खट्टा और कम मीठा होता है। इसकी लंबी आकृति और तोते की चोंच जैसी नुकीली नाक इसकी खास पहचान है। पकने पर इसका छिलका पीला और गूदा पीले-नारंगी रंग का हो जाता है। एक फल का वजन सामान्यतः 250 से 500 ग्राम तक होता है।
खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और जलवायु
इस किस्म की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली लाल दोमट, जलोढ़ और लेटराइट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का पीएच 6.5 से 7.5 के बीच होना बेहतर रहता है। 24 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और पर्याप्त नमी फसल के अच्छे विकास में मदद करती है। हालांकि फूल आने के समय अधिक बारिश होने से परागण प्रभावित हो सकता है।
कब और कैसे करें रोपाई
तोतापुरी आम की रोपाई के लिए अगस्त-सितंबर और फरवरी-मार्च का समय उपयुक्त माना जाता है। रोपाई से पहले 1×1×1 मीटर के गड्ढे तैयार कर उनमें गोबर की खाद या कंपोस्ट मिलाना चाहिए। पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखें और समय-समय पर सूखी शाखाओं की छंटाई करें। शुरुआती वर्षों में खरपतवार नियंत्रण और सिंचाई पर विशेष ध्यान देने से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।









