Lucknow fire victim story: लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों को गहरा दर्द दिया है। इस हादसे में हरियाणा के सोनीपत जिले के मइपुर गांव निवासी 22 वर्षीय भविष्य की भी मौत हो गई। भविष्य अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और उनके सपनों को पूरा करने के लिए हाल ही में लखनऊ आया था। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि उसका यह सफर इतनी जल्दी खत्म हो जाएगा।
नौकरी के लिए आया था लखनऊ
परिजनों के अनुसार, भविष्य 10 जून को ही लखनऊ पहुंचा था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने नौकरी शुरू की थी। वह जिस इमारत में काम करता था, उसी के पास किराए के कमरे में रहता था। उसका उद्देश्य परिवार का सहारा बनना और घर की जिम्मेदारियों को संभालना था।
मां से हुई आखिरी बातचीत
हादसे के समय भविष्य की अपनी मां से वीडियो कॉल पर बात हो रही थी। उसके चाचा और दादा ने बताया कि वह बहुत घबराया हुआ था। उसने मां से कहा कि कमरे में बहुत ज्यादा धुआं भर गया है और सांस लेने में परेशानी हो रही है। धीरे-धीरे धुआं बढ़ता गया और उसकी हालत खराब होने लगी। इसी दौरान अचानक वीडियो कॉल कट गई। परिवार ने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फिर उससे कोई बात नहीं हो सकी। यही बातचीत उसकी मां के साथ आखिरी बातचीत बन गई।
दादा से किया था एक वादा
भविष्य के दादा ने भावुक होकर बताया कि जब वह घर से निकला था, तब उसने उनसे कहा था कि वह मेहनत करके परिवार की अच्छी तरह देखभाल करेगा। उसने दादा से वादा किया था कि वह उनके लिए कुछ अच्छा करेगा और माता-पिता की जिंदगी बेहतर बनाएगा। दादा ने कहा कि भविष्य हमेशा परिवार की चिंता करता था और जल्द से जल्द घर की आर्थिक हालत सुधारना चाहता था। लेकिन उसके सारे सपने अधूरे रह गए।
परिवार की आर्थिक स्थिति है कमजोर
परिवार के लोगों ने बताया कि भविष्य घर का इकलौता बेटा था। उसके पिता एक निजी स्कूल में छोटी नौकरी करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। परिवार के पास केवल थोड़ी खेती की जमीन है, जिससे घर का खर्च चलाना मुश्किल होता है। भविष्य की एक छोटी बहन है, जिसने स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। परिवार ने सरकार से मांग की है कि बहन को सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि वह अपने माता-पिता और बुजुर्ग दादा-दादी का सहारा बन सके।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
भविष्य के दादा ने इस हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब कोई बड़ा हादसा होता है, तब कुछ दिनों तक जांच और कार्रवाई की बात होती है, लेकिन बाद में सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। उन्होंने मांग की कि जिन इमारतों में सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नहीं हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही ऐसे मामलों में कड़े नियम बनाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े।
परिवार को मिला शव
परिजनों ने बताया कि प्रशासन और सरकार के हस्तक्षेप से उन्हें पोस्टमार्टम के बाद शव जल्दी मिल गया। इसके लिए उन्होंने प्रशासन का आभार भी जताया। हालांकि, भविष्य को खोने का दुख इतना बड़ा है कि परिवार अब भी इस सदमे से बाहर नहीं निकल पा रहा है।
