Verification Failure: लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटरों के खिलाफ लगातार हुई पुलिस कार्रवाई ने किराएदार सत्यापन व्यवस्था की गंभीर खामियों को सामने ला दिया है। समिट बिल्डिंग, ओमैक्स आर-2 और साइबर हाइट्स में हुई कार्रवाई के दौरान 130 से अधिक साइबर ठगों की गिरफ्तारी हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि इन मामलों में किराएदारों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था। यही लापरवाही अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना साबित हो रही है। पहचान की पर्याप्त जांच नहीं होने के कारण आरोपी किराए के फ्लैट लेकर लंबे समय तक अवैध गतिविधियां चलाते रहे।
कई अपराधों में कनेक्शन
मामला केवल साइबर ठगी तक सीमित नहीं है। पुलिस जांच में सामने आए कई अन्य मामलों में भी यही स्थिति देखने को मिली है। किराए के मकानों और फ्लैटों से सेक्स रैकेट संचालित होने, लूटपाट की घटनाओं और अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं में भी आरोपितों के किराएदार होने के बावजूद उनका पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था। ऐसे में अपराधियों के लिए बिना सही पहचान दर्ज कराए किराए पर मकान हासिल करना आसान हो जाता है। पुलिस का मानना है कि अगर मकान मालिक समय पर सत्यापन कराएं तो संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पहले ही मिल सकती है।
मकान मालिकों की लापरवाही
कमिश्नरेट पुलिस समय-समय पर मकान मालिकों से किराएदारों का पुलिस सत्यापन कराने की अपील करती रहती है। इसके लिए संबंधित थाने के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करने के साथ ऑनलाइन सुविधा का विकल्प भी उपलब्ध है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग इसे महज औपचारिकता मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही अपराधियों के लिए फायदेमंद साबित होती है। वे कई बार फर्जी या अधूरी पहचान के आधार पर फ्लैट किराए पर लेकर महीनों तक साइबर ठगी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियां संचालित करते रहते हैं।
फ्लैट बने अपराधियों के अड्डे
पिछले कुछ वर्षों में गोमतीनगर, सुशांत गोल्फ सिटी और चिनहट समेत लखनऊ के कई इलाकों में किराए के फ्लैटों से साइबर ठगी और सेक्स रैकेट संचालित होने के मामले सामने आए हैं। वहीं ठाकुरगंज में एक बांग्लादेशी महिला के किराए के मकान में अवैध रूप से रहने का मामला भी सामने आया था। इन घटनाओं ने किराएदारों की पहचान और पते की जांच की जरूरत को और महत्वपूर्ण बना दिया है। पुलिस का मानना है कि समय रहते सत्यापन होने पर संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है और अपराध को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है।
ऐसे कराएं सत्यापन
मकान किराए पर देने से पहले मालिक को किराएदार का आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र, स्थायी पते का प्रमाण और मोबाइल नंबर लेना चाहिए। इसके बाद किरायानामा तैयार कर उसकी एक प्रति सुरक्षित रखनी चाहिए। किराएदार का निर्धारित सत्यापन फॉर्म संबंधित थाने में जमा किया जा सकता है या कमिश्नरेट की उपलब्ध ऑनलाइन सुविधा के जरिए आवेदन किया जा सकता है। पुलिस दस्तावेजों की जांच और उपलब्ध जानकारी का मिलान करती है। जरूरत पड़ने पर किराएदार के स्थायी पते और पहचान का भौतिक सत्यापन भी कराया जा सकता है। इससे मकान मालिकों को भी भविष्य में किसी अप्रिय स्थिति से बचने में मदद मिल सकती है।








