शनिवार, अक्टूबर 10, 2026
  • Login
News1India
  • राष्ट्रीय
  • देश
  • विदेश
  • राज्य ▼
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्ली
    • बिहार
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
  • क्राइम
  • बिजनेस
  • टेक्नोलॉजी
  • धर्म
  • मौसम
  • ऑटो
  • खेल
🔍

EWS आरक्षण संविधान का उल्लंघन नहीं, केंद्र के संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

by Muskaan Rajput
नवम्बर 7, 2022
in एडिटर चॉइस, राष्ट्रीय, विशेष
Share on FacebookShare on Twitter

सुप्रीम कोर्ट ने EWS आरक्षण को हरी झण्डी दिखाई है सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दिये जा रहे 10 प्रतिशत आरक्षण को सही ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने 10% EWS कोटे को 3-1 के मत से सही ठहराया है।

जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में अपना फैसला सुनाया और वहीं देश के चीफ जस्टिस आँफ इण्डिया उदय उमेश ललित और जस्टिस एस रवींद्र भट ने इस मुद्दे पर अपनी असहमति जताई।

RELATED NEWS

Van Film Thumak Thumak Song

सिद्धार्थ मल्होत्रा–तमन्ना भाटिया ने दिल्ली में लॉन्च किया ‘वन’ का ‘ठुमक ठुमक’ गाना, फोकलोर फैंटेसी का दिखा भव्य अंदाज़

सितम्बर 22, 2026
gomti book festival lucknow

Gomti Book Festival: सीएम योगी की युवाओं से अपील- सोशल मीडिया पर समय न गंवाएं, किताबें पढ़ने की डालें आदत

सितम्बर 12, 2026

तीनों न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी के बहुमत के अनुसार,  आर्थिक मानदंडों के आधार पर सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दिया जा रहा EWS आरक्षण संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं करता है। वही तीनों जजों ने यह भी माना है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण 50% आरक्षण की सीमा का उल्लंघन भारतीय संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है।

न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी के बहुमत के फैसले ने कहा

आरक्षण राज्य द्वारा सकारात्मक कार्रवाई का एक साधन है ताकि सभी समावेशी दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जा सके। यह न केवल सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को शामिल करने के लिए एक साधन है। ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षण 50% की उच्चतम सीमा के कारण बुनियादी ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है।

जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने भी अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य ईडब्ल्यूएस की उन्नति के लिए संशोधन लेकर आया है। अपनी बात जारी रखते हुए आगे उन्होनें कहा, कि संशोधन को ईडब्ल्यूएस वर्ग के लाभ के लिए संसद द्वारा एक सकारात्मक कार्रवाई के रूप में माना जाना चाहिए। इसे अनुचित वर्गीकरण नहीं कहा जा सकता है। ईडब्ल्यूएस को अलग वर्ग के रूप में मानना उचित वर्गीकरण होगा। असमानों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा सकता। असमानों के साथ समान व्यवहार करना संविधान के तहत समानता का उल्लंघन करता है। संशोधन ईडब्ल्यूएस का एक अलग वर्ग बनाता है। एसईबीसी के बहिष्कार को भेदभावपूर्ण या संविधान का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता है।

हालांकि, अपने असहमति वाले फैसले में जस्टिस एस रवींद्र भट ने कहा कि आर्थिक मानदंडों पर आरक्षण उल्लंघन नहीं है। हालांकि, एससी/एसटी/ओबीसी के गरीबों को आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों से बाहर करके (इस आधार पर कि उन्हें लाभ मिला है), 103वां संशोधन संवैधानिक रूप से भेदभाव के निषिद्ध रूपों का अभ्यास करता है।

“हमारा संविधान बहिष्कार की अनुमति नहीं देता है और यह संशोधन सामाजिक न्याय के ताने-बाने को कमजोर करता है और इस तरह बुनियादी ढांचे को कमजोर करता है। यह संशोधन हमें यह विश्वास करने के लिए भ्रमित कर रहा है कि सामाजिक और पिछड़े वर्ग का लाभ पाने वालों को किसी तरह बेहतर स्थिति में रखा गया है। इस अदालत ने कहा है कि 16(1 ) और (4) समान समानता सिद्धांत के पहलू हैं। एसईबीसी के गरीबों को बाहर करने का लक्षण वर्णन गलत है। जिसे लाभ के रूप में वर्णित किया गया है उसे मुफ्त पास के रूप में नहीं समझा जा सकता है, यह एक प्रतिपूरक तंत्र है जिसकी भरपाई की जा सकती है। जस्टिस भट ने आरक्षण के मामलों में 50% की सीमा के उल्लंघन के खिलाफ भी राय व्यक्त की।

आगे उन्होंने कहा, 50% के उल्लंघन की अनुमति देने से विभाजन होगा। समानता के अधिकार का नियम आरक्षण का अधिकार बन जाएगा जो हमें वापस चंपकम दोरैराजन में ले जाएगा

जानिये क्या है EWS आरक्षण का पूरा मामला

याचिकाओं ने संविधान (103वां) संशोधन अधिनियम 2019 की वैधता को चुनौती दी थी। जनवरी 2019 में संसद द्वारा पारित संशोधन के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में खंड (6) को सम्मिलित करके नौकरियों और शिक्षा में आर्थिक आरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया था।

नव सम्मिलित अनुच्छेद 15(6) ने राज्य को शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण सहित नागरिकों के किसी भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान करने में सक्षम बनाया। इसमें कहा गया है कि इस तरह का आरक्षण अनुच्छेद 30 (1) के तहत आने वाले अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर निजी संस्थानों सहित किसी भी शैक्षणिक संस्थान में किया जा सकता है, चाहे वह सहायता प्राप्त हो या गैर-सहायता प्राप्त। इसमें आगे कहा गया है कि आरक्षण की ऊपरी सीमा दस प्रतिशत होगी, जो मौजूदा आरक्षण के अतिरिक्त होगी।

तत्कालीन सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस बीआर गवई की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह 5 अगस्त, 2020 को मामलों को संविधान पीठ को भेज दिया था।

कौन है EWS?

1) जिसकी पारिवारिक आय 8 लाख प्रतिवर्ष से कम है

2) जिसके पास 5 एकड़ से कम कृषि योग्य भूमि है।

3 )जिनके पास अधिसूचित म्युनिसिपल क्षेत्र में 1000 वर्ग फिट से कम का मकान हो या 100 वर्ग गज से कम का आवासीय प्लॉट हो

Tags: breaking newsNews1Indiasupreme court news hindisupreme court of india
Share196Tweet123Share49

Muskaan Rajput

Related Posts

Van Film Thumak Thumak Song

सिद्धार्थ मल्होत्रा–तमन्ना भाटिया ने दिल्ली में लॉन्च किया ‘वन’ का ‘ठुमक ठुमक’ गाना, फोकलोर फैंटेसी का दिखा भव्य अंदाज़

by SYED BUSHRA
सितम्बर 22, 2026

नई दिल्ली, 21 सितंबर 2026: सुपरनैचुरल फैंटेसी फिल्म ‘वन’ का बहुप्रतीक्षित ठुमका गाना लॉन्च होते ही चर्चा का विषय बन...

gomti book festival lucknow

Gomti Book Festival: सीएम योगी की युवाओं से अपील- सोशल मीडिया पर समय न गंवाएं, किताबें पढ़ने की डालें आदत

by SYED BUSHRA
सितम्बर 12, 2026

 Gomti Book Festival Lucknow:प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 सितंबर को लखनऊ यूनिवर्सिटी में पांचवें गोमती बुक फेस्टिवल का...

UP weather

UP Weather Today: यूपी में कमजोर पड़ा मानसून, कुछ इलाकों में हो सकती है हल्की बारिश

by SYED BUSHRA
सितम्बर 9, 2026

 UP Weather:उत्तर प्रदेश में पिछले करीब चार-पांच दिनों से मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। प्रदेश के ज्यादातर जिलों...

इंडोनेशिया में पीएम मोदी ने किया ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर का दर्शन,भारत-इंडोनेशिया ने सांस्कृतिक रिश्तों को दी नई मजबूती

Allahabad High Court का बड़ा फैसला, कोविड ड्यूटी में जान गंवाने वाले हेड कांस्टेबल की पत्नी को मिलेंगे 50 लाख रुपये

by SYED BUSHRA
जुलाई 9, 2026

Allahabad High Court Judgment: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोविड-19 महामारी के दौरान ड्यूटी करते हुए जान गंवाने वाले...

UP IPS Transfer News

UP News :लखनऊ पुलिस में बड़े बदलाव की तैयारी, कई आईपीएस अफसरों की बदलेगी जिम्मेदारी

by SYED BUSHRA
जुलाई 9, 2026

UP Police IPS Transfer: उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में जल्द ही बड़े स्तर पर आईपीएस अधिकारियों के तबादले और नई...

Next Post

योगी आदित्यनाथ के आदेशों की उड़ाई जा रही धज्जियां, अभी तक नहीं शुरू हुआ सड़कों में गड्ढे भरने का काम

जमीन की खरीद-बिक्री के मामले में विष्णु अग्रवाल को ED का नोटिस, जानें पूरा मामला

News1India

Copyright © 2025 New1India

Navigate Site

  • About us
  • Privacy Policy
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • राष्ट्रीय
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्ली
    • बिहार
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
  • क्राइम
  • बिजनेस
  • टेक्नोलॉजी
  • धर्म
  • मौसम
  • ऑटो
  • खेल

Copyright © 2025 New1India

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In