IMA Passing Out Parade 2026: भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की पासिंग आउट परेड इस बार कई मायनों में खास और ऐतिहासिक रही। अकादमी के 94 साल के इतिहास में पहली बार 9 महिला कैडेट्स ने पुरुष कैडेट्स के साथ “अंतिम पग” पार किया और भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुईं। यह उपलब्धि केवल इन महिला कैडेट्स के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश और भारतीय सेना के लिए गर्व का क्षण है।
राष्ट्रपति ने ली परेड की सलामी
13 जून, 2026 का दिन भारतीय सेना के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। देहरादून स्थित आईएमए में आयोजित पासिंग आउट परेड में कुल 481 भारतीय कैडेट्स और 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट्स पास आउट हुए। इस भव्य समारोह में भारत की राष्ट्रपति ने परेड की सलामी ली और युवा अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं।
एनडीए से शुरू हुआ सफर
इस ऐतिहासिक उपलब्धि की शुरुआत अगस्त 2022 में हुई थी, जब पहली बार महिला कैडेट्स के एक बैच ने नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) में प्रवेश लिया। तीन साल की कठिन ट्रेनिंग के बाद मई 2025 में 18 महिला कैडेट्स ने अपनी पढ़ाई पूरी की। इनमें से 9 कैडेट्स ने भारतीय सेना में अधिकारी बनने का फैसला किया और आगे की सैन्य ट्रेनिंग के लिए देहरादून स्थित आईएमए पहुंचीं।
एक साल की कठिन सैन्य ट्रेनिंग
आईएमए में इन महिला कैडेट्स ने लगभग एक साल तक कड़ी शारीरिक और सैन्य ट्रेनिंग हासिल की। इस दौरान उन्होंने वही चुनौतियां और प्रशिक्षण पूरा किया, जो पुरुष कैडेट्स को दिया जाता है। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने पुरुष कैडेट्स के साथ “अंतिम पग” पार किया और स्थायी कमीशन के साथ सेना में अधिकारी बनीं।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका नई नहीं है। साल 1992 में पहली बार महिलाओं को चिकित्सा सेवाओं के अलावा अन्य शाखाओं में शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से अधिकारी बनने का अवसर मिला था। इसके बाद महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती गई।
अब तक महिलाएं मुख्य रूप से ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए), आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विस और मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के माध्यम से सेना में सेवाएं देती रही हैं। लेकिन आईएमए से पुरुष कैडेट्स के साथ प्रशिक्षण लेकर स्थायी कमीशन प्राप्त करना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
बदलाव और समान अवसर का प्रतीक
इस बार की पासिंग आउट परेड सिर्फ एक सैन्य समारोह नहीं थी, बल्कि यह भारतीय समाज में बदलती सोच और महिलाओं को मिल रहे समान अवसरों का भी प्रतीक बनी। 9 महिला कैडेट्स का यह सफर आने वाली पीढ़ियों की युवतियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को नई दिशा देगा।








