शिव तांडव की गूंज में दिखा ऑपरेशन सिंदूर का प्रहार, धमाकों संग मिटाए दुश्मन के निशान…

वीडियो में यह दर्शाया गया है कि भारतीय सेना ने सीमावर्ती इलाकों में दुश्मन के ठिकानों पर कैसे सटीक हमला किया। इसमें मिसाइल हमले, तोपों से गोलाबारी और ड्रोन द्वारा किए गए हमलों के दृश्य शामिल हैं, जो सेना की बेहतरीन तैयारी और रणनीतिक दक्षता को दर्शाते हैं।

Operation Sindoor

Operation Sindoor : भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने रविवार, 18 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से संबंधित एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में सीमा पार किए गए सैन्य अभियान की झलक देखने को मिलती है, जिसमें सेना की तेज़, सटीक और रणनीतिक कार्रवाई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इसमें दुश्मन के ठिकानों पर मिसाइलों, तोपों और ड्रोन के माध्यम से किए गए हमलों के दृश्य शामिल हैं।

वीडियो के साथ साझा संदेश में लिखा गया: “प्लांड, ट्रेन्ड एंड एग्जीक्यूटेड। जस्टिस सर्व्ड।” – यानी यह ऑपरेशन पूरी तरह से योजना के अनुसार अंजाम दिया गया और दुश्मन को उचित जवाब मिला।

धूल में मिलाए गए दुश्मन के सारे अड्डे

वीडियो फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कैसे भारतीय सैनिकों ने सीमावर्ती इलाकों में स्थित दुश्मन के बंकरों और सैन्य ढांचों को निशाना बनाकर पूरी तरह तबाह कर दिया। मिसाइलों की ताकत, तोपों की गर्जना और ड्रोन से की गई सर्जिकल स्ट्राइक्स यह दर्शाते हैं कि भारतीय सेना किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।

इसी सप्ताह, वेस्टर्न कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अग्रिम चौकियों का निरीक्षण किया और ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत जवानों द्वारा दिखाई गई बहादुरी और रणनीतिक कौशल की सराहना की।

दो चरणों में हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’

गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर 6 मई से 10 मई 2025 तक दो चरणों में संचालित किया गया था।

दूसरे चरण के दौरान, भारत ने लगभग 15 ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें पाकिस्तान के खिलाफ दागीं, जिनका निशाना उनके प्रमुख वायु ठिकाने थे—जैसे राफिक़ी, मुरीदके, नूर खान और चुनियां। इन सटीक हमलों ने पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली और कमांड कंट्रोल नेटवर्क को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।

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खास बात यह रही कि भारतीय वायुसेना ने पहले डमी फाइटर जेट्स भेजे, जिससे पाकिस्तान भ्रमित हो गया। इसके बाद असली मिसाइलों ने आक्रमण किया, जिससे दुश्मन की रडार प्रणाली इन हमलों को पहचान नहीं सकी।

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