Women Empowerment: एक समय था जब वाहन चलाने को लेकर महिलाओं को कई तरह की रूढ़िवादी धारणाओं और टिप्पणियों का सामना करना पड़ता था। उनके ड्राइविंग कौशल पर सवाल उठाए जाते थे, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में महिलाओं के बीच ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की बढ़ती संख्या इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश कर रही है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में जिले की 12,393 महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया है। यह आंकड़ा न केवल महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है, बल्कि उनकी आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास में आए बदलाव की भी कहानी कहता है।
एक साल में 43 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी
वर्ष 2024 में गौतमबुद्धनगर में 3,854 महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किया था। वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 5,539 तक पहुंच गई। यानी केवल एक वर्ष के भीतर लाइसेंस बनवाने वाली महिलाओं की संख्या में 43 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी महिलाओं के प्रति समाज की बदलती सोच और परिवारों से मिल रहे समर्थन का परिणाम है। अब महिलाएं शिक्षा, रोजगार और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए स्वयं वाहन चलाने को प्राथमिकता दे रही हैं।
2026 में बन सकता है नया रिकॉर्ड
वर्ष 2026 के शुरुआती पांच महीनों में ही करीब 3,000 महिलाएं ड्राइविंग लाइसेंस बनवा चुकी हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि वर्ष के अंत तक महिलाओं द्वारा बनवाए गए लाइसेंस की संख्या पिछले सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकती है।
यदि यही रफ्तार बनी रही तो गौतमबुद्धनगर में महिला ड्राइवरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी। इससे महिलाओं की स्वतंत्र आवाजाही और सामाजिक भागीदारी को भी मजबूती मिलेगी।
रोजगार और शिक्षा के अवसरों का असर
जानकारों का कहना है कि गौतमबुद्धनगर देश के तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक, कारोबारी और शैक्षणिक केंद्रों में शामिल है। यहां रोजगार और शिक्षा के बढ़ते अवसरों ने महिलाओं को अधिक सक्रिय और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है।
एआरटीओ नंद कुमार के अनुसार, महिलाएं न केवल ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर रही हैं, बल्कि निर्धारित ड्राइविंग टेस्ट और अन्य प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पूरा भी कर रही हैं। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
महिलाओं के बीच ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की बढ़ती प्रवृत्ति केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव का संकेत भी है। यह दिखाता है कि महिलाएं अब पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।









