Sheila Devi Success Story: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के देवा ब्लॉक के मुज्जफरमऊ गांव में महिलाओं ने अपनी मेहनत और हिम्मत से एक नई पहचान बनाई है। जो महिलाएँ कभी सिर्फ घर के काम तक सीमित थीं, वे आज अपने हाथों से बने जूट के सामान को देश के बड़े शहरों तक पहुंचा रही हैं। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह शीला देवी हैं, जिन्होंने अपने संघर्ष और मेहनत से न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि कई अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया।
छोटे कर्ज से शुरू हुआ बड़ा सफर
वर्ष 2019 से पहले शीला देवी एक सामान्य गृहिणी थीं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनके जीवन में नया मोड़ आया। उन्होंने ग्रामीण बैंक से छोटा कर्ज लिया और स्वयं सहायता समूह का हिस्सा बनीं। लगातार मेहनत और लगन के दम पर वे पहले समूह की अध्यक्ष बनीं और बाद में अपनी खुद की कंपनी शुरू कर दी। आज उनकी कंपनी से 17 स्वयं सहायता समूहों की करीब 150 महिलाएँ जुड़ी हुई हैं। हर महीने यहां 10 से 15 हजार जूट उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
यहां बनते हैं कई तरह के जूट उत्पाद
शीला देवी की कंपनी में जूट से बने कई उपयोगी और आकर्षक सामान तैयार किए जाते हैं। इनमें जूट बैग, बोतल कवर, फाइल फोल्डर, डायरी बैग, लैपटॉप बैग, स्कूल बैग, महिलाओं के पर्स, पेंसिल बॉक्स, गमले, मेज कवर, पायदान और फ्रिज कवर शामिल हैं। इन उत्पादों के लिए कच्चा माल कोलकाता से मंगाया जाता है, जबकि तैयार सामान देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता है।
सरकारी दफ्तरों से भी मिल रहे बड़े ऑर्डर
ब्लॉक मिशन मैनेजर ममता देवी के अनुसार, बाराबंकी, लखनऊ, अयोध्या, सुलतानपुर, हरदोई, गोंडा और उन्नाव के कई सरकारी कार्यालयों से जूट फाइल फोल्डर और बोतल बैग की लगातार मांग आ रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, विकास भवन और ग्राम्य विकास विभाग जैसे कई सरकारी संस्थानों में नियमित रूप से इन उत्पादों की आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा मुंबई, दिल्ली, गुजरात, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी इनकी अच्छी मांग है।
महिलाएं बन रही हैं आर्थिक रूप से मजबूत
शीला देवी बताती हैं कि इस काम से जुड़ी हर महिला हर महीने लगभग 15 से 20 हजार रुपये तक की कमाई कर रही है। इसके साथ ही वे अपनी आय का 30 से 40 प्रतिशत तक बचा भी रही हैं। जो महिलाएँ पहले आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर थीं, वे आज अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
प्रदेश के लिए बनी प्रेरणा
शीला देवी के इस शानदार काम की सराहना प्रदेश सरकार ने भी की है। उनका नाम प्रदेश के चार आइकॉन में शामिल करने के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि छोटी बचत से शुरू हुआ यह सफर आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है। बाराबंकी की इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि अगर अवसर और मेहनत साथ हों, तो गांव की महिलाएँ भी पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।







