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Zorawar Light Tank: हिमालय की सुरक्षा का नया योद्धा ‘जोरावर’, स्वदेशी टैंक बर्फीले पहाड़ों में दुश्मन के छुड़ाएगा छक्के

Zorawar Light Tank: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश में विकसित किया गया ‘जोरावर’ लाइट टैंक केवल 19 महीनों में तैयार किया गया है। इसे खास तौर पर हिमालयी क्षेत्रों और ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों में युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह टैंक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बढ़ती चुनौतियों और सीमावर्ती इलाकों में तैनात आधुनिक दुश्मन टैंकों का मुकाबला करने के लिए तैयार किया गया है। कम वजन और आधुनिक तकनीक के कारण यह कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।

नाम के पीछे है गौरवशाली इतिहास

आजइस टैंक का नाम प्रसिद्ध सैन्य सेनापति के सम्मान में रखा गया है। उन्हें ‘लद्दाख का विजेता’ भी कहा जाता है। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया था। भारत ने इस नाम के जरिए यह संदेश दिया है कि यह टैंक पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ऊंचे पहाड़ों में भी शानदार प्रदर्शन

करीब 25 टन वजन वाला यह टैंक कम ऑक्सीजन, बर्फीले रास्तों और कठिन पहाड़ी इलाकों में आसानी से काम कर सकता है। इसकी अधिकतम रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा है और यह एक बार में लगभग 450 किलोमीटर तक सफर कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए तेजी से किसी भी सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचाया जा सकता है। इससे सेना को जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिलेगी।

आधुनिक हथियारों से लैस

जोरावर टैंक को अत्याधुनिक हथियारों से सुसज्जित किया गया है। इसमें 105 मिमी की मुख्य तोप और ऑटो-लोडिंग प्रणाली लगी है, जिससे तेजी से फायरिंग की जा सकती है। इसके अलावा इसमें कई अन्य आधुनिक हथियार भी शामिल हैं। इनमें मशीन गन, रिमोट कंट्रोल हथियार प्रणाली और उन्नत टैंक रोधी मिसाइलें शामिल हैं। भविष्य में इसमें और नई सुरक्षा तकनीकों को भी जोड़ा जाएगा।

शक्तिशाली इंजन और बेहतर तकनीक

इस टैंक में 760 हॉर्सपावर का डीजल इंजन लगाया गया है। भविष्य में इसकी क्षमता और बढ़ाने की योजना भी है। इसका आधुनिक सस्पेंशन सिस्टम कठिन और पथरीले रास्तों पर भी बेहतर संतुलन बनाए रखता है। यही वजह है कि यह टैंक लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे दुर्गम क्षेत्रों में आसानी से संचालन कर सकता है।

सेना ने दिया बड़ा ऑर्डर

भारतीय सेना ने शुरुआती चरण में इस टैंक की 59 यूनिट खरीदने का फैसला किया है। भविष्य में सेना को कुल 354 लाइट टैंकों की जरूरत बताई गई है। इसके लिए आगे और खरीद प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

लद्दाख में सफल रहा परीक्षण

जोरावर टैंक का परीक्षण लद्दाख के न्योमा क्षेत्र में 4,200 मीटर से अधिक ऊंचाई पर किया गया। परीक्षण के दौरान इसने फायरिंग, सुरक्षा और गतिशीलता से जुड़े सभी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया। उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2027 तक यह टैंक भारतीय सेना का हिस्सा बन जाएगा और सीमाओं की सुरक्षा को नई ताकत देगा।

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