France FIFA World Cup 2030: फीफा विश्व कप 2026 में फ्रांस को खिताब का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन सेमीफाइनल में स्पेन से 2-0 की हार के साथ उसका सफर समाप्त हो गया। ग्रुप चरण में शानदार प्रदर्शन करने वाली फ्रांसीसी टीम ने नॉकआउट के शुरुआती तीन मुकाबलों में एक भी गोल नहीं खाया था, लेकिन अंतिम चार में स्पेन के खिलाफ हार ने खिलाड़ियों और प्रशंसकों दोनों को निराश कर दिया। अब अगले फीफा विश्व कप 2030 की तैयारी शुरू होने के साथ टीम में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि मौजूदा टीम के तीन अनुभवी खिलाड़ी अगले विश्व कप तक फ्रांस की टीम का हिस्सा नहीं रहेंगे।
लुकास डिग्ने और एन्गोलो कांते का भविष्य मुश्किल
फ्रांस के अनुभवी डिफेंडर लुकास डिग्ने का नाम उन खिलाड़ियों में सबसे आगे है, जिनका 2030 विश्व कप खेलना मुश्किल माना जा रहा है। स्पेन के खिलाफ सेमीफाइनल में उनके फाउल के कारण विरोधी टीम को पेनल्टी मिली थी, जिसने मैच का रुख बदल दिया। डिग्ने जल्द ही 33 वर्ष के होने वाले हैं और उम्र को देखते हुए अगले विश्व कप तक उनका टीम में बने रहना आसान नहीं माना जा रहा। वहीं स्टार मिडफील्डर और टीम के उपकप्तान एन्गोलो कांते को पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। 35 वर्षीय कांते के स्थान पर फ्रांस ने नए खिलाड़ियों को तैयार करना शुरू कर दिया है। ऐसे में उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
गोलकीपर ब्राइस सांबा की जगह भी खतरे में
फ्रांस के बैकअप गोलकीपर ब्राइस सांबा भी उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिनका 2030 विश्व कप खेलना कठिन माना जा रहा है। वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट… (क्षमा करें, फुटबॉल) में पदार्पण करने वाले सांबा अब तक केवल चार अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल पाए हैं। 32 वर्ष की उम्र में टीम प्रबंधन ने उनके विकल्प के रूप में युवा गोलकीपर रॉबिन रिस्सर को तैयार करना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में फ्रांस युवा खिलाड़ियों पर अधिक भरोसा करेगा, ताकि 2030 विश्व कप के लिए मजबूत टीम तैयार की जा सके।
मैक्रों ने जताया भरोसा, भविष्य को लेकर उम्मीद बरकरार
स्पेन से हार के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टीम का हौसला बढ़ाया। उन्होंने स्पेन को जीत की बधाई देते हुए लिखा कि यह हार स्वीकार करना कठिन है, लेकिन फ्रांस की टीम युवा है और भविष्य में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की क्षमता रखती है। पूरे टूर्नामेंट में फ्रांस ने सात मुकाबलों में छह जीत दर्ज की और कुल 16 गोल किए, जबकि उसके खिलाफ केवल चार गोल हुए। सेमीफाइनल से पहले नॉर्वे और सेनेगल ही फ्रांस के खिलाफ गोल कर पाए थे, जबकि नॉकआउट चरण के शुरुआती मुकाबलों में टीम ने शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन किया। अब फ्रांस की नजर 2030 विश्व कप पर होगी, जहां युवा खिलाड़ियों के साथ नई शुरुआत करने की तैयारी की जा सकती है।









