Venkatapathy Raju Birthday: भारतीय क्रिकेट में 90 का दशक शानदार स्पिन गेंदबाजों के लिए जाना जाता है। इसी दौर में हैदराबाद से एक ऐसे बाएं हाथ के स्पिनर ने भारतीय टीम में जगह बनाई, जिसने अपनी शानदार फ्लाइट और सटीक गेंदबाजी से दुनिया के कई बड़े बल्लेबाजों को मुश्किल में डाल दिया। उनका नाम था वेंकटपति राजू। आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनके क्रिकेट सफर की कुछ खास बातें।
‘मसल्स’ नाम के पीछे की कहानी
वेंकटपति राजू का शरीर काफी दुबला-पतला था। इसी वजह से दक्षिण अफ्रीका के ऑलराउंडर ब्रायन मैकमिलन ने मजाक में उन्हें ‘मसल्स’ नाम दिया था। हालांकि शरीर से भले ही वे साधारण दिखते थे, लेकिन उनकी गेंदबाजी में कमाल की ताकत थी। वे गेंद को हवा में उछालकर बल्लेबाजों को आगे आने के लिए मजबूर करते थे और फिर अपनी स्पिन से उन्हें चकमा दे देते थे। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।
डेब्यू मैच में बनी अलग पहचान
साल 1990 में न्यूजीलैंड के खिलाफ क्राइस्टचर्च टेस्ट से वेंकटपति राजू ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। इस मैच में उन्हें पहली पारी में नाइट वॉचमैन के रूप में बल्लेबाजी के लिए भेजा गया। उन्होंने करीब दो घंटे तक क्रीज पर टिककर 31 रन बनाए। यह उनके पूरे टेस्ट करियर का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर भी रहा। इस दौरान दूसरे छोर पर कई बल्लेबाज आउट होते रहे, लेकिन राजू डटे रहे।
श्रीलंका के खिलाफ यादगार प्रदर्शन
राजू के करियर का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन साल 1990 में चंडीगढ़ टेस्ट में देखने को मिला। श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने पहली पारी में 12 रन देकर 6 विकेट लिए। खास बात यह रही कि उन्होंने सिर्फ 39 गेंदों में 2 रन देकर 5 बल्लेबाजों को आउट कर दिया। इस शानदार गेंदबाजी के दम पर श्रीलंका की पूरी टीम केवल 82 रन पर सिमट गई और भारत ने पारी और 8 रन से मुकाबला जीत लिया। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें अपने करियर का पहला और एकमात्र ‘मैन ऑफ द मैच’ पुरस्कार मिला।
घरेलू मैदानों पर रहा शानदार रिकॉर्ड
भारतीय पिचों पर वेंकटपति राजू की गेंदबाजी बेहद असरदार रही। उन्होंने भारत में खेले 16 टेस्ट मैचों में 71 विकेट लिए। वहीं विदेशों में खेले 12 टेस्ट मैचों में उनके खाते में 22 विकेट आए। यही वजह रही कि उनका टीम में आना-जाना लगा रहा। इसके बावजूद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन किया। रणजी ट्रॉफी में उन्होंने कुल 589 विकेट लिए और हैदराबाद की टीम को कई अहम जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।
विश्व कप से चयनकर्ता बनने तक का सफर
वेंकटपति राजू ने भारत के लिए 28 टेस्ट मैचों में 93 विकेट और 53 वनडे मैचों में 63 विकेट लिए। वे 1992 और 1996 के क्रिकेट विश्व कप में भी भारतीय टीम का हिस्सा रहे। साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता टेस्ट उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला रहा। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी उन्होंने खेल से रिश्ता नहीं छोड़ा। उन्होंने कोच के रूप में कई टीमों के साथ काम किया और भारतीय टीम के चयनकर्ता की जिम्मेदारी भी निभाई।









