Strong Despite after Defeat: महिलाओं के 53 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में मीनाक्षी से 4-6 से हारने के बाद भारतीय पहलवान विनेश फोगाट भावुक नजर आईं। मुकाबले के तुरंत बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह खुद को असफल नहीं मानती हैं। उनका कहना था कि इस हार के बावजूद उनका आत्मविश्वास और संघर्ष करने का जज्बा कमजोर नहीं हुआ है।
“मैं असफल नहीं हुई हूं”
मुकाबला खत्म होने के बाद विनेश ने कहा, “मैं फेल नहीं हुई हूं।” उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि वह इस हार को अपने करियर का अंत नहीं मानतीं। उन्होंने कहा कि मैदान पर मिली हार एक अलग बात है, लेकिन उन्होंने जिन परिस्थितियों का सामना किया, वह उससे कहीं ज्यादा कठिन थीं।
व्यवस्था से लड़ने की बात
विनेश ने कहा कि उन्हें केवल अपने प्रतिद्वंद्वी से ही नहीं, बल्कि कई दूसरी चुनौतियों से भी जूझना पड़ा। उन्होंने कहा, “मैं एक तरफ थी और बाकी सब दूसरी तरफ थे।” उनके इस बयान को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के साथ लंबे समय से चले आ रहे विवाद और संघर्ष के संदर्भ में देखा जा रहा है।
लंबे समय से चल रहा विवाद
पिछले कुछ समय से विनेश फोगाट और भारतीय कुश्ती महासंघ के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं। इसी विवाद के कारण उन्हें प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी। पहले उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय से राहत मिली और बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दे दी। इसके बाद ही वह चयन प्रक्रिया में शामिल हो सकीं।
हर मौके के लिए करना पड़ा संघर्ष
विनेश ने कहा कि उन्हें हर अंक और हर अवसर के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। उनके अनुसार, उन्हें वह माहौल और मौका नहीं मिला, जिसकी एक खिलाड़ी को जरूरत होती है। उन्होंने कहा, “मुझे हर अंक के लिए लड़ना पड़ा। मुझे सही अवसर नहीं मिला।” यह बयान उनके भीतर की पीड़ा और संघर्ष को साफ तौर पर दर्शाता है।
वापसी का लिया संकल्प
हालांकि हार के बाद भी विनेश ने हार नहीं मानी है। उन्होंने साफ कहा कि वह अपनी तैयारी जारी रखेंगी और आगे भी मेहनत करती रहेंगी। उन्होंने यह जरूर बताया कि फिलहाल उन्होंने अगली प्रतियोगिता को लेकर कोई फैसला नहीं किया है। इसके बावजूद उनका संदेश साफ था कि वह खेल से दूरी बनाने के बजाय और मजबूत होकर लौटना चाहती हैं।
भविष्य पर टिकी निगाहें
भारतीय कुश्ती की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल विनेश फोगाट का यह बयान उनके जुझारू स्वभाव को दिखाता है। खेल प्रेमियों को अब इंतजार रहेगा कि वह अगली बार किस प्रतियोगिता में उतरेंगी और किस तरह वापसी करेंगी। उनकी कहानी संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।









