Bengal Shaheed Diwas Political Clash: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर शहीद दिवस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा होता दिख रहा है। लंबे समय से All India Trinamool Congress इस कार्यक्रम को अपनी राजनीतिक पहचान के तौर पर पेश करती रही है, लेकिन अब Indian National Congress ने भी इस आयोजन पर अपनी दावेदारी जतानी शुरू कर दी है।
कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई ने ऐलान किया है कि वह 21 जुलाई को कोलकाता के शहीद मीनार मैदान में बड़ी रैली आयोजित करेगी। इस घोषणा के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि कांग्रेस अब उस राजनीतिक विरासत को फिर से अपने नाम से जोड़ना चाहती है, जिसकी शुरुआत उसके दौर में हुई थी।
कांग्रेस ने किया बड़ा ऐलान
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Shubhankar Sarkar ने पार्टी कार्यालय ‘बिधान भवन’ में इस कार्यक्रम की घोषणा की। उन्होंने कहा कि करीब तीन दशक बाद कांग्रेस शहीद दिवस के मौके पर बड़े स्तर पर आयोजन करने जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अब फिर से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का मानना है कि शहीद दिवस की असली शुरुआत कांग्रेस के दौर में हुई थी और इस पर उसका भी अधिकार है।
कैसे हुई थी शहीद दिवस की शुरुआत
शहीद दिवस की शुरुआत 21 जुलाई 1993 से मानी जाती है। उस समय पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा सरकार थी। कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में एक रैली के दौरान पुलिस फायरिंग हुई थी, जिसमें 13 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी।
उस समय Mamata Banerjee कांग्रेस में थीं और आंदोलन का नेतृत्व कर रही थीं। बाद में कांग्रेस ने उन कार्यकर्ताओं की याद में इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाना शुरू किया।
कुछ वर्षों बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस बनाई। इसके बाद धीरे-धीरे शहीद दिवस का आयोजन पूरी तरह टीएमसी के नियंत्रण में आ गया और हर साल बड़ी रैलियां आयोजित होने लगीं।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि कई वर्षों तक टीएमसी ने इस आयोजन पर पूरी तरह कब्जा बनाए रखा। पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्हें सार्वजनिक तौर पर कार्यक्रम करने की अनुमति तक नहीं दी जाती थी। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि उन्हें मजबूरी में पार्टी कार्यालय के अंदर छोटे स्तर पर शहीद दिवस मनाना पड़ता था। अब पार्टी खुलकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
पुराने नेताओं को दिया खुला न्योता
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार और पार्टी पर्यवेक्षक Ghulam Ahmad Mir ने कांग्रेस से जुड़े पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी वापस आने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग कांग्रेस की विचारधारा में भरोसा रखते हैं, उनके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं। इस बयान को बंगाल की बदलती राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ेगी गर्मी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शहीद दिवस को लेकर कांग्रेस और टीएमसी के बीच मुकाबला आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। यह मुद्दा सिर्फ एक कार्यक्रम का नहीं, बल्कि राजनीतिक पहचान और जनाधार से भी जुड़ा हुआ है।


