Delhi Parliament March: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले 20 जुलाई को दिल्ली की सड़कों पर जमकर हंगामा हुआ। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान जंतर-मंतर से लेकर जनपथ और रायसीना रोड तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार टकराव हुआ। पुलिस के अनुसार, इस दौरान 118 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि 15 से 20 सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा। करीब 70 लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी बात सामने आई है। दूसरी ओर, CJP ने साफ कर दिया है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है और 21 जुलाई को भी संसद की ओर मार्च निकाला जाएगा।
CJP ने आज फिर संसद मार्च का किया ऐलान
20 जुलाई की देर रात प्रदर्शनकारी एक बार फिर जंतर-मंतर पर जुट गए। इसके बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि आंदोलन को समाप्त नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को भी संसद की ओर मार्च निकाला जाएगा और प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर अपना धरना जारी रखेंगे। ऐसे में पहले दिन हुए टकराव के बाद अब 21 जुलाई के प्रदर्शन को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। दिल्ली में संसद और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत किया गया है।
जंतर-मंतर से जनपथ तक कैसे बिगड़े हालात
CJP ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहा था, लेकिन भीड़ के आगे बढ़ने के साथ स्थिति तनावपूर्ण होती चली गई। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने लागू धारा 163 के निर्देशों का उल्लंघन किया और बैरिकेड हटाकर आगे जाने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हुई, जो कुछ ही समय में हिंसक झड़प में बदल गई। जंतर-मंतर, जनपथ और रायसीना रोड समेत कई इलाकों में तनाव बना रहा और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।
पुलिस का दावा- पथराव में 118 जवान घायल
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस का दावा है कि 15 से 20 सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई, जबकि जनपथ इलाके में कुछ दुकानों को भी नुकसान पहुंचने की सूचना मिली। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, हिंसा में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घायलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, डीसीपी स्तर के अधिकारी, एसीपी और महिला पुलिसकर्मी भी शामिल बताए गए हैं। पुलिस ने दावा किया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए करीब 70 लोगों को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) समेत अन्य कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों के घायल होने का भी दावा
पुलिस के अनुसार, झड़प के दौरान करीब 60 प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। अधिकारियों का कहना है कि हिंसक स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने जरूरी कार्रवाई की। हिरासत में लिए गए लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हिरासत में लिए गए सभी लोग वास्तव में आंदोलन से जुड़े छात्र थे या फिर कुछ अन्य लोग भी भीड़ में शामिल थे। दूसरी ओर, CJP नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं और आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
अभिजीत दीपके ने ढाई दिन बाद खत्म किया अनशन
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने करीब ढाई दिन बाद सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाए जाने के बाद भूख हड़ताल शुरू की थी। हालांकि, अनशन खत्म करने के बावजूद उन्होंने आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का प्रदर्शन जारी रहेगा और मंगलवार को भी संसद की ओर मार्च निकाला जाएगा।
जेपी नड्डा से दो दौर में हुई बातचीत
प्रदर्शन के बीच सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिश भी हुई। CJP की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से दो अलग-अलग दौर में मुलाकात की। पहली बैठक सुबह करीब 11:50 बजे हुई, जिसमें नड्डा ने प्रतिनिधियों से उनकी मांगों की जानकारी मांगी और लिखित ज्ञापन देने को कहा। इसके बाद शाम करीब चार बजे प्रतिनिधियों ने अपना ज्ञापन सौंपा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में CJP की तीन प्रमुख मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। हालांकि, जेपी नड्डा ने आंदोलन समाप्त करने और शांति बनाए रखने की अपील जरूर की।
गृह मंत्रालय ने पूरे घटनाक्रम पर रखी नजर
दिल्ली में हुए पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार लगातार नजर बनाए रही। सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पूरे दिन वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में रहे और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी लेते रहे। सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि हालात को जल्द से जल्द नियंत्रित किया जाए और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए। साथ ही अधिकारियों से यह भी कहा गया कि जहां तक संभव हो, स्थिति संभालने के लिए न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया जाए। अब 21 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।








