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Delhi Fake Job Racket: Tata Motors में नौकरी का झांसा देकर 500 लोगों से ठगी, 5 आरोपी गिरफ्तार

Delhi Fake Job Racket:  दिल्ली पुलिस की एएटीएस ने नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक, वजीराबाद इलाके के संगम विहार स्थित एक फ्लैट में फर्जी कॉल सेंटर चलाया जा रहा था। यहां से बेरोजगारों को निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे पैसे लिए जाते थे।

डीसीपी निहारिका भट्ट के अनुसार, सूचना मिलने के बाद एएटीएस टीम ने परिसर पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान कॉल सेंटर संचालक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मौके से 9 मोबाइल फोन, 7 एटीएम कार्ड और 2 बैंक पासबुक समेत अन्य सामान बरामद किया है।

जॉब पोर्टल से जुटाते थे उम्मीदवारों का डेटा

जांच में सामने आया कि आरोपी नौकरी तलाशने वालों का डेटा जॉब पोर्टल ऐप से हासिल करते थे। इसके बाद कॉल सेंटर में काम करने वाली टेली-कॉलर्स उम्मीदवारों से संपर्क करती थीं।

उन्हें डेटा एंट्री ऑपरेटर, वेब डिजाइनर, डेटा एनालिस्ट और अकाउंटेंट जैसे पदों पर नौकरी का अवसर देने की बात कही जाती थी। इसके बाद इंटरव्यू और भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के नाम पर उम्मीदवारों से रकम मांगी जाती थी।

पांच चरणों में वसूली का आरोप

पुलिस के मुताबिक, गिरोह कथित तौर पर अलग-अलग बहानों से पांच चरणों में लोगों से पैसे लेता था। अब तक की जांच में करीब 500 लोगों से लगभग 20 लाख रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और ठगी से जुड़े बैंक खातों में कितनी रकम का लेन-देन हुआ।

आरोपी को खुद हुई थी नौकरी के नाम पर ठगी

पुलिस के अनुसार, कॉल सेंटर संचालक सतीश मौर्या की उम्र 36 वर्ष है। उसने एमएससी की पढ़ाई की और पहले एक्सिस बैंक, टाटा मोटर्स समेत कुछ संस्थानों में काम कर चुका था।

बताया गया है कि नौकरी तलाशने के दौरान उसके साथ भी ₹500 की ठगी हुई थी। इसके बाद उसने कथित तौर पर इसी तरह का फर्जी भर्ती नेटवर्क शुरू करने की योजना बनाई। पहले वह अन्य लोगों के साथ कॉल सेंटर चलाता था, लेकिन करीब एक साल से इसे अकेले संचालित कर रहा था।

तीन महीने से चल रहा था कॉल सेंटर

पुलिस के मुताबिक, सतीश ने करीब तीन महीने पहले संगम विहार स्थित परिसर में कॉल सेंटर शुरू किया था। उसने जॉब पोर्टल के जरिए टेली-कॉलर्स की भर्ती की और उसी प्लेटफॉर्म से नौकरी तलाशने वालों का डेटा लेकर उनसे संपर्क कराया।

फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।

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