Jantar Mantar Protest Story : जंतर-मंतर पर युवा आंदोलन के दौरान संविधान की प्रस्तावना पढ़कर भारतीय लोकतंत्र के मायने समझाने वाले मोहम्मद इरफान की आखिरकार राहुल गांधी से मुलाकात हो गई। आंदोलन के दौरान अपने प्रभावशाली बयान से देशभर का ध्यान खींचने वाले इरफान ने कहा था कि अगर उन्हें राहुल गांधी से मिलने का मौका मिला तो वह उनसे एक वादा मांगेंगे। इरफान के मुताबिक, वह राहुल गांधी से कहना चाहते थे कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो देश के मजदूरों और श्रमिकों को उनका उचित अधिकार दिलाने का काम करें।
घर पहुंचे राहुल
सोमवार दोपहर राहुल गांधी इरफान के घर पहुंचे और उनसे मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच देश और समाज से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत हुई। मुलाकात के बाद इरफान काफी खुश नजर आए। उन्होंने राहुल गांधी के सामने देश की समस्याओं को बेबाकी से रखा और अपनी बात उनके साथ साझा की। बताया गया कि राहुल गांधी ने भी इरफान की बातों को काफी ध्यान से सुना। इस मुलाकात को लेकर इरफान ने अपनी खुशी जाहिर की।
भारत जोड़ो यात्रा
इरफान ने बताया कि जब देश में नफरत और सांप्रदायिकता को लेकर माहौल गर्म था, तब राहुल गांधी के ‘मोहब्बत की दुकान’ संदेश ने उन्हें प्रभावित किया। इसी सोच से प्रभावित होकर वह भारत जोड़ो यात्रा में भी शामिल हुए और दिल्ली से कश्मीर तक पैदल चले। यात्रा के अनुभव साझा करते हुए इरफान ने दावा किया कि राहुल गांधी मजदूरों से मिलने के लिए रात के दो बजे तक पहुंच जाते थे। उनके मुताबिक, यही बातें उन्हें विश्वास दिलाती हैं कि राहुल गांधी गरीबों और मजदूरों की समस्याओं को समझते हैं।
कौन हैं इरफान
मोहम्मद इरफान इन दिनों जंतर-मंतर के आंदोलन से सामने आए अपने वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। एक तरफ वह गोपालदास नीरज की कविताओं को प्रभावशाली अंदाज में सुनाते हैं, तो दूसरी ओर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का धाराप्रवाह पाठ करते हैं। उनकी भाषा और बोलने के अंदाज ने आंदोलन में मौजूद लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचा। बताया जाता है कि बाहरी दिल्ली की एक झुग्गी में रहने वाले इरफान का परिवार आर्थिक मुश्किलों से गुजरता रहा है। परिवार का खर्च चलाने के लिए वह ठेला लगाकर काम करते हैं।
फोन से पढ़ाई
इरफान कभी औपचारिक स्कूल नहीं जा सके और आर्थिक परिस्थितियों के कारण उनका बचपन काफी मुश्किलों में गुजरा। उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन और इंटरनेट का सहारा लिया। वह घंटों गूगल पर अलग-अलग सवालों के जवाब तलाशते और ऑनलाइन सामग्री सुनकर खुद को शिक्षित करते रहे। इसी तरह उन्होंने उर्दू के मशहूर शायर अहमद फराज और हिंदी के कवि गोपालदास नीरज की रचनाओं के साथ-साथ मजदूरों के कानूनी अधिकारों के बारे में भी जानकारी हासिल की। उनकी यही सीखने की इच्छा उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।
आंदोलनों से जुड़ाव
इरफान का कहना है कि वह करीब 15 वर्षों से अलग-अलग आंदोलनों से जुड़े रहे हैं। शुरुआती दौर में वह रामलीला मैदान में होने वाले आंदोलनों में केवल खाना खाने के लिए पहुंचते थे, लेकिन धीरे-धीरे वहां अलग-अलग विचारों और मुद्दों को समझने लगे। इसके बाद उन्होंने 2011 के अन्ना आंदोलन को भी करीब से देखा। बाद में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए आंदोलन में भी उन्होंने अपनी बात रखी। जब दिल्ली में छात्रों और युवाओं का सीजेपी आंदोलन शुरू हुआ, तो वह भी उसका हिस्सा बन गए।
संविधान से बनाई पहचान
आंदोलन के दौरान जहां बड़ी संख्या में लोग नारे लगा रहे थे, वहीं इरफान हाथ में संविधान लेकर उसकी प्रस्तावना का पाठ करने लगे। उन्होंने अपनी गंभीर और प्रभावशाली आवाज में ‘हम भारत के लोग…’ से प्रस्तावना पढ़ी। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और देखते ही देखते वह चर्चा में आ गए। लोगों ने उनके भाषण और संविधान की समझ की सराहना की। इसी वीडियो के बाद देशभर में इरफान को लेकर चर्चा शुरू हुई और उनकी पहचान जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े एक चर्चित चेहरे के रूप में बनने लगी।
मुश्किलों से निकले इरफान
इरफान ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उनके परिवार के पास खाने तक के पर्याप्त पैसे नहीं थे। उनके मुताबिक, वह यमुना में पूजा के बाद बहाए गए नारियल इकट्ठा करके लाते थे। इन्हीं नारियल को खाकर पेट भरते और कुछ नारियल बसों में बेचकर रोजमर्रा के खर्च के लिए पैसे जुटाते थे। बाद में झुग्गी टूटने के कारण उनका परिवार बेघर भी हो गया। ऐसे मुश्किल दौर में एक एनजीओ की मदद से उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर मजदूरी का काम मिला। परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्होंने ठेला भी लगाया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने सीखने और समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने का सिलसिला जारी रखा।







